भारतकोश
पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

Panchadashi by Swami Vidyaranya

स्वामी विद्यारण्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ

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ब्रह्मानन्दान्तर्गत योगानन्द का संक्षेप १०१


समय उसे वह महानन्द भी तो मिल ही रहा है। वह तो अब दो दृष्टि वाला हो गया है। विपत्ति के पहाड़ टूटने पर भी वह वैदिक ब्रह्मानन्द को याद करके उद्विग्न नहीं हो पाता है। इस प्रकार जागरण काल में चाहे तो दुःखानुभव हो रहा हो चाहे सुखानुभव होता हो, और चाहे वह उदासीन होकर चुप- चाप बैठा हो, तत्वज्ञानी को सदा ही ब्रह्मानन्द दीखा करता है। इतना ही नहीं, इस जागरण की वासना से जो सपने बनते हैं उनमें भी उसको ब्रह्मसुख भासने लग पड़ता है। सपने आनन्द- वासना से भी आते हैं और अविद्यावासना से भी आते हैं। जब इस ज्ञानी को अविद्यावासना के स्वप्न आयेंगे तब इसे भी अज्ञा- नियों की तरह सुख दुःख देखना पड़ेगा ही। सुषुप्ति अवस्था में, उदासीन काल में, समाधि भावना के समय तथा सुख दुःख भोगते हुए भी स्वयंप्रकाश ब्रह्मानन्द को प्रकाशित करने वाला योगी का प्रत्यक्ष कैसा होता है वह इस प्रकरण में बताया गया।