भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

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१५ राज योग और प्रव्रज्या दोनों प्रकार के योग जन्म कुंडली में हों— सन्याससिद्धि । पृ० ६६८-६७१ २८. अट्ठाईसवाँ अध्याय : उपसंहार । अट्ठाईस अध्यायों में से-प्रत्येक में किस विषय का फलादेश बताया है इसका विवरण-ग्रंथकार का परिचय । पृ० ६७२-६७३ २९. परिशिष्ट—विंशोत्तरी महादशा में अन्तर्दशा चक्र-कालचक्र दशा में अन्तर्दशा चक्र-चन्द्र स्पष्ट से भुक्त-भोग्य काल चक्र महादशा निकालने की सारिणी नं० १, २, ३, ४ पृ० ६७४-६७९