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प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press

by आदि शङ्कराचार्य

Source: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (origin)

DevanagariSanskritpublished86 pages

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अनुग्रह नित्यानन्दसुधानिधेरधिगतः सन्नीलमेघः सता- मौत्कण्ठ्यप्रबलप्रभञ्जनभरैराकर्षितो वर्षति । विज्ञानामृतमद्भुतं निजवचोधाराभिरारादिदं चेतश्चातक चेन्न वाञ्छसि मृषाक्रान्तोऽसि सुप्तोऽसि किम् नित्यानन्दरूपी अमृतके समुद्रसे निकला हुआ और सज्जनों- की उत्कण्ठारूप प्रबल वायुसे उड़ाकर लाया हुआ सत्स्वरूप नीलमेघ तेरे पास ही अद्भुत विज्ञानामृतकी अपने वचनरूपी धाराओंमें वर्षा कर रहा है। अरे चित्तरूपी पपीहे ! यदि तुझे उसे पीनेकी इच्छा नहीं होती तो तुझे व्यर्थ ही किसीने पकड़ रक्खा है, या तू सो गया है ? चेतश्चञ्चलतां विहाय पुरतः सन्धाय कोटिद्वयं तत्रैकत्र निधेहि सर्वविषयानन्यत्र च श्रीपतिम् । विश्रान्तिर्हितमप्यहो क्व नु तयोर्मध्ये तदालोच्यतां युक्त्या वानुभवेन यत्र परमानन्दश्च तत्सेव्यताम् ॥ अरे चित्त ! चञ्चलताको छोड़कर अपने सामने तराजूके दोनों पलड़ोंको रख; उनमेंसे एकमें समस्त विषयोंको और दूसरेमें भगवान् श्रीपतिको रख। उन दोनोंमेंसे किसमें अधिक शान्ति और हित है इसका विचार कर, और युक्ति तथा अनुभवसे जिसमें परमानन्दकी प्रतीति हो उसीका सेवन कर। ७१