प्रश्नोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

प्रश्नोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Prashna Upanishad Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
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( ३ )
| मन्त्रप्रतीकानि | प्र० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|
| यच्चित्तस्तेनैष प्राणम् | ३ | १० | ४५ |
| यथा सम्राडेव | ३ | ४ | ३८ |
| यदा त्वमभिवर्षसि | २ | १० | ३१ |
| यदुच्छ्वासनिःश्वासौ | ४ | ४ | ५६ |
| यः पुनरेतं त्रिमात्रेण | ५ | ५ | ७८ |
| या ते तनूर्वाचि | २ | १२ | ३३ |
| विज्ञानात्मा सह | ४ | ११ | ७१ |
| विश्वरूपं हरिणम् | १ | ८ | १० |
| व्रात्यस्त्वं प्राणैकर्षिंरत्ता | २ | ११ | ३२ |
| स ईक्षांचक्रे | ६ | ३ | ९९ |
| स एष वैश्वानरः | १ | ७ | १० |
| स प्राणमसृजत | ६ | ४ | १०९ |
| स यथेमा नद्यः | ६ | ५ | ११२ |
| स यदा तेजसा | ४ | ६ | ६५ |
| स यदा सोभ्य | ४ | ७ | ६६ |
| स यद्येकमात्रम् | ५ | ३ | ७६ |
| संवत्सरो वै प्रजापतिः | १ | ९ | ११ |
| सोऽभिमानादूर्ध्वम् | २ | ४ | २६ |
| हृदि ह्येष आत्मा | ३ | ६ | ४० |