पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 12, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ें१० सूचीपत्र । पृष्ठ ९० चन्द का मंत्र की परीक्षा करना और वीरों का प्रगट होना ॥ ... ... ,, ९१ वीरों के रूप आदि का वर्णन ॥ ... ... ... ३०४ ९२ चन्द का वीरों को देख कर प्रसन्न होना ॥ ... ... ... ३०६ ९३ चन्द का वीरों की पूजा करना ॥ ... ... ... ,, ९४ चन्द का पृथ्वीराज के लिये शत्रुशमन मंत्र ग्रहण करना ॥ ... ... ,, ९५ क्षेत्रपालों (वीरों) का पूछना कि हम लोगों को क्यों बुलाया है ॥ ... ... ,, ९६ चन्द का यह उत्तर देना कि हमने पृथ्वीराज की सहायता के लिये आप लोगों को बुलाया है ॥ ३०७ ९७ चन्द का प्रार्थना करना कि जैसे श्र प राम रावण आदि की लड़ाई में रक्षा करते आए ऐसे ही पृथ्वीराज की भी करना ॥ ... ... ... ,, ९८ वीरों का प्रसन्न होकर कहना कि जब गाढ़ पड़े तब स्मरण करना ॥ ... ... ,, ९६ भैरव का एक वीर को आज्ञा देना कि सब वीरों का नाम बतला कर चन्द को पहिचनवा दो ॥ ३०८ २० सब वीरों का नाम गुण कथन ॥ ... ... ... ,, २१ चन्द का बावनो वीरों को पहिचान कर प्रणाम करके विदा करना और आप पृथ्वीराज से मिलने के लिये आगे बढ़ना ॥ ... ... ... ३११ २२ चन्द का उस जङ्गल का वर्णन करना जहां पृथ्वीराज आखेट खेलता है ॥... ... ,, २३ पृथ्वीराज के शिकार की प्रशंसा ॥ ... ... ... ३१२ २४ कन्ह चौहान आदि सब सरदारों का आकर पृथ्वीराज से मिलना और कहना कि आज यहीं शिकार हो ॥ ... ... ... ३१५ २५ पृथ्वीराज का शिकार से घर की ओर लौटना ॥ ... ... ... ,, २६ गोठ (भोजन) के स्थान पर ठहरना ॥ ... ... ... ,, २७ चन्द वरदाई का आकर पृथ्वीराज से मिलना और पिछला सब वृत्तान्त एकान्त में लेजाकर कहना ,, २८ पृथ्वीराज का भोजन करना और फिर आगे बढ़ना ॥ ... ... ... ३१६ २६ सब सरदारों को एक एक घोड़ा बांट दिया उसी पर सब चढ़ कर चले ॥ ... ... ,, ३० कवि चन्द को एक हाथी देना जो महा बलवान था ॥ ... ... ... ,, ३१ कवि चन्द का पृथ्वीराज की स्तुति करना ॥ ... ... ... ३१७ ३२ सब लोगों को अपने अपने घर बिदा करना ॥ ... ... ... ३१८ ३३ वीरों के मिलने के समाचार से पृथ्वीराज का प्रसन्न होना ॥ ... ... ,, ३४ पृथ्वीराज की प्रशंसा ॥ ... ... ... ,, ३५ दूसरे दिन सबेरे पृथ्वीराज का उठना और नित्य कृत्य करना ॥ ... ... २१६ ३६ महा कर दस गोदान दस तोला सोना और बहुत सा अन्नदान देना ॥ ... ... ,, ३७ महल में पृथ्वीराज का विराजना और सरदारों का आना ॥ ... ... ,, ३८ वीरों के वश होने की बात से पृथ्वीराज का पेट फूलता है पर किसी से कह नहीं सकता ॥ ३२० ३६ कैमास का हाथ जोड़ कर पूछना कि आपको मुख पर कुछ उत्साह दिखाई देता है पर आप खुल कर कहते क्यों नहीं ॥ ... ... ... ,, ४० पृथ्वीराज का चन्द के वीरों को वश करने का समाचार कहना ॥ ... ... ,, ४१ सरदारों का उपहास करके कहना कि भाट, नट, चारन, ये सब आरत हैं इनकी बात सत्य नहीं माननी चाहिए ॥ ... ... ... ३२१ ४२ कैमास ने कहा कि चन्द को देवो ने वरदान दिया है यह सचमुच कोई अवतार है ॥ ... ,, ४३ कन्ह ने कहा कि चन्द छूट गया था यह बात सच है, इसी पर उसने यह बात प्रसन्न करने के लिये गढ़ी है ॥ ... ... ... ,, ४४ पृथ्वीराज के मन में सन्देह हो जाना ॥ ... ... ... ३२२ ४५ इतने में चन्द का आकर आसीस देना ॥ ... ... ... ,) ४६ पृथ्वीराज का चन्द को पास बुलाकर वीरों की बात छेड़ना ॥ ... ... ,, ४७ पृथ्वीराज का चन्द की बड़ाई करके कहना कि हम लोगों की बड़ी अभिलाषा है सो आज वीरों का दर्शन करवाओ ॥ ... ... ... ,, ४८ कवि चन्द का मंत्र जपना और होम करना ॥ ... ... ... ३२३ ४६ वीरों का प्रगट होना ॥ ... ... ... ,,