भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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Nagari-prachariui Granthmala Series No. 4 THE PRITHVÍRÁJ RÁSO OF CHAND BARDÁÍ, VOL. I. EDITED BY Mohanlal Visnulal Pandia, Radha Krishna Das AND Syam Sundar Das, B. A. ऽ पुराणों की अनुक्रमणिका का कथन करता है ॥ ... ... ... १७ नी लघुता वर्णन करता है ॥ ... ... ... } तापित होकर अपने को पूर्व-कवियों का दास होना उन की उक्ति को कहना और अपनी १६ कना कहता है ॥ ... ... ... ... ... " चंद खलों का स्वभाव वर्णन करके सुजनों के निमित्त अपना काव्य रचन करना कहता है ॥ ... " सरस्वती की स्तुति ॥ ... ... ... ... " गणेश की स्तुति ॥ ... ... ... ... २० गणपति की उत्पत्ति की कथा ॥ ... ... ... ... २१ शंकर की स्तुति ॥ ... ... ... ... २२ कवि की आशा का स्वरूप वर्णन ॥ ... ... ... ... " चंद का काव्य समुद्र कैसा है ॥ ... ... ... ... २३ कोई अशुद्ध पढ़नेवाला चंद को काव्य-संबन्धी-दोष न दे ॥ ... ... ... " इस ग्रंथ में चंद ने क्या क्या कथन किया है ॥ ... ... ... " रासो को रसिया सरस उच्चारै ॥ ... ... ... ... २४ रासो का तत्त्वज्ञान कैसे होगा ॥ ... ... ... ... " जो रासो को सुगुरु से पढ़ता है वह कुमति नहीं दरसाता ॥ ... ... २५ रासो किस को अच्छा और किस को बुरा प्रतीत होता है ॥ ... ... " इस ग्रंथ के काव्य की संख्या का कथन ॥ ... ... ... " रासो के ढँके हुए अर्थ के विषय में कवि का कथन ॥ ... ... ... " इस ग्रंथ के विषयों का संक्षेप कथन ॥ ... ... ... २६ राजा परीक्षित को तक्षक दंशन और जनमेजय की सर्पसत्र कथा ॥ ... ... ३३ उस तक्षक का आबू पर अपना अर्बुद नाम धर रहना ॥ ... ... " गालव ऋषि के शिष्य उत्तङ्ग का उपाख्यान ॥ ... ... ... ३४ वशिष्ठ ऋषि का आबू पर तप करना और उनकी नंदनी गौ का अथाह बिल में गिरना ...