राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४ उसमें मुख्य-मुख्य बातें छोड़ दी गई हैं या उलट-पुलट लिखी हैं। मुहणोत नैणसी की ख्यात से इस राज्य के वर्तमान नरेशों के प्रारम्भिक इतिहास की बहुत-कुछ पूर्ति होती है। कई फ़ारसी तवारीखों में भी यथाप्रसंग प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास आया है। अंग्रेज़ी इतिहासों में माल्कम की रिपोर्ट, टॉड-कृत "राजस्थान"। प्रतापगढ़ राज्य का गैज़ेटियर, लॉयल राजपूताना आदि पुस्तकें इस राज्य के इतिहास के लिए उपयोगी सिद्ध हुई हैं। हिन्दी भाषा की पुस्तकों में "वीरविनोद" और उर्दू की पुस्तकों में "वक़ाये राजपूताना" में इस राज्य का बहुत कुछ इतिहास मिलता है। इन पुस्तकों के अतिरिक्त महारावत हरिसिंह-निर्मित ग्रंथ तथा हरिसिंह और प्रतापसिंह के आश्रय में भिन्न-भिन्न विद्वानों-द्वारा रचित पुस्तकें भी इस राज्य के इतिहास के लिए उपयोगी हैं। प्रस्तुत ग्रंथ में प्रतापगढ़ राज्य के संक्षिप्त भौगोलिक परिचय एवं प्राचीन इतिहास के अतिरिक्त क्षेमकर्ण से लगाकर वर्तमान समय तक के प्रतापगढ़ के नरेशों का विस्तृत तथा सरदारों और प्रसिद्ध घरानों आदि का संक्षिप्त इतिहास है। इसके प्रणयन में मैंने ऊपरिलिखित सामग्री का पूरा- पूरा उपयोग किया है। यह सत्य है कि निरन्तर लड़ाई-झगड़ों में व्यस्त रहने के कारण प्रतापगढ़ के नरेशों का भी अन्य राजपूत राज्यों के राजाओं की भांति इतिहास सुरक्षित नहीं रह सका है, फिर भी जो कुछ इतिहास उपलब्ध है उससे उनके अतीत गौरव पर पर्याप्त प्रकाश पड़ता है। जहां तक बना आधुनिक शोध को स्थान देकर मैंने इसे सर्वांगपूर्ण बनाने का प्रयत्न किया है। अंध परंपरागत जनश्रुतियां, ख्यातों तथा काव्यों आदि में लिखी हुई कल्पित और खुशामद भरी बातें वास्तविक इतिहास को कितना नष्ट-भ्रष्ट कर सकती हैं, इसका मैंने कई स्थल पर संकेत किया है और वही बातें ग्रहण की हैं, जिनकी अन्यत्र पुष्टि हो जाती है। जहां-जहां ऐतिहासिक त्रुटियां दिखाई पड़ीं, मैंने यथाशक्य उनका निरा- करण करने का प्रयत्न किया है। प्रतापगढ़ राज्य में अभी शोध के लिए पूरा स्थान है। इस राज्य के घोटासीं, वरमंडल, वीरपुर, खेरोट, गौतमेश्वर, अरणोद, अचूंडला, नीनोर