झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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लक्ष्मीबाई १३५ 'हम किसी भी मौके को चूकने नही देना चाहते । हमारे इलाको के बीच बीच में ये जो छोटी छोटी रियासते हैं, काफी खिझलाहट का कारण है । इनको अपने हाथ में कर लेने से खजाने मे रुपया बढेगा और हमारी शासन प्रणाली से इन रजवाडो की जनता को लाभ ही लाभ प्राप्त होगा ।' जिस समय खरीतो सहित मालकम की चिट्ठी कलकत्ता पहुची डलहौजी अवध की ओर दौरे पर गया हुआ था । चार पाच महीने तक कोई उत्तर नही आया ।