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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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६ झाँसी की रानी उस समय के इस प्रकार के वह आश्रय—रघुनाथराव—अपनी निष्क्रियता में मुश्किल से दो वर्ष टिक पाये थे कि झाँसी के अडोस-पडोस तक में लूटमार, भम्भड और दङ्गा-फसाद होने लगा । झाँसी राज्य पर अनेक साहूकारो का बहुत कर्जा चढ गया । इसलिये सन् १८३७ में झाँसी राज्य कोर्ट कर लिया गया । रघुनाथराव ने राज्य के कोर्ट होने के पहले ही झाँसी का बचा-खुचा खजाना भाड-भगतियों में वितरित कर दिया और अपने पुत्र नवाब अलीबहादुर को करेरा, पिछोर तथा डामरोन परगनो के ८५ गाँव जागीर में लगा दिये; जिसकी आय साढे छहत्तर हजार रुपये वार्षिक समझी जाती थी । रघुनाथराव ने एक काम और किया—सखूबाई को कैद से मुक्त कर दिया । सन् १८३८ में रघुनाथराव का देहान्त हो गया ।