झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६ झाँसी की रानी उस समय के इस प्रकार के वह आश्रय—रघुनाथराव—अपनी निष्क्रियता में मुश्किल से दो वर्ष टिक पाये थे कि झाँसी के अडोस-पडोस तक में लूटमार, भम्भड और दङ्गा-फसाद होने लगा । झाँसी राज्य पर अनेक साहूकारो का बहुत कर्जा चढ गया । इसलिये सन् १८३७ में झाँसी राज्य कोर्ट कर लिया गया । रघुनाथराव ने राज्य के कोर्ट होने के पहले ही झाँसी का बचा-खुचा खजाना भाड-भगतियों में वितरित कर दिया और अपने पुत्र नवाब अलीबहादुर को करेरा, पिछोर तथा डामरोन परगनो के ८५ गाँव जागीर में लगा दिये; जिसकी आय साढे छहत्तर हजार रुपये वार्षिक समझी जाती थी । रघुनाथराव ने एक काम और किया—सखूबाई को कैद से मुक्त कर दिया । सन् १८३८ में रघुनाथराव का देहान्त हो गया ।