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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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पृष्ठ 8

कृतज्ञता-ज्ञापन

कठिन परिस्थितियो में इस पुस्तक की छपाई हुई । टाईप ढालने वालो ने बेहद परेशान किया । फिर कागज वालो का नम्बर आया । इन सब हैरानियो से किसी प्रकार पार पा लिया । मैं अपने कम्पोजिटरो, प्रेस मैन, और अन्य कर्मचारियो को किन शब्दो में धन्यवाद दूॅ ? मुझे उनकी लगन को देखकर विस्मय होता था । पर वे अपनी रानी के सम्बन्ध की पुस्तक तैयार कर रहे थे । कभी कभी तो रो तक देते थे । मेरे पुत्र चिः सत्यदेव ने जो अथक परिश्रम, अपने थोडे से साधनो के प्रश्रय से किया है उसके लिये क्या कहू । नया रिवाज धन्यवाद का है, परन्तु हम दोनो ज़रा पुरानी संस्कृति में सने हैं, इसलिये उसकी पीठ पर केवल हाथ फेरता हूँ । श्री कालीचरण वर्मा झाँसी के होनहार चित्रकार हैं । रानी के युद्ध का उन्होने जो चित्र दिया है उस पर बहुत परिश्रम किया है । मै कृतज्ञ हूँ । हम दोनो झाँसी के हैं और वह मुझसे आयु में छोटे हैं, इसलिये वे नही चाहते कि कुछ और लिखूं । झाँसी } २४ अक्टूबर, १६४६ } वृन्दावनलाल वर्मा