रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
by सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री)
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Read in context३२६ रसतरङ्गिणी नरसादर, चूलिकालवण तथा चुल्लिकालवण, ये नाम नौसादर (Ammo- nium chloride) के कहे जाते हैं ॥ १–२ ॥ वक्तव्य—नौसादर पञ्जाब में कई स्थानों पर मिट्टी में से निकाला जाता है। इस अशुद्ध नौसादर को जल में घोल कर इस जल को पृथक् करके इससे नौसादर बनाया जाता है। इसको बनाने के लिये नौसादर जल में तब तक लवणाम्ल डालें जब तक कि वह उदासीन न हो जाय। लवणाम्ल को थोड़ा- थोड़ा डालते हुए जल को हिलाते रहना चाहिये। अब इस घोल में से बाष्पस्वे- दन यन्त्र द्वारा जलवाष्प उड़ा दें, कुछ जलीयांश रहने पर पात्र को नीचे उतार कर ठंडा होने दें। कुछ समय बाद इसमें क्षार के स्फटिक नीचे बैठ जाते हैं जिसे Ammonium chloride कहते हैं ॥ १–२ ॥ वक्तव्य—ईंट पकाने के लिये भट्ठे में जलाई जानेवाली बबूल आदि की लकड़ियों से जो क्षार निकलता है और जो बाज़ार में सफेद-सफेद टिकियाओं के रूप में मिलता है उसे नौसादर कहा जाता है। नवसादरस्य शोधनम् नवसारन्तु सलिले त्रिगुणे द्रावयेद्भिषक् । वस्त्रपूतं ततः कृत्वा भाजने स्थापयेत्ततः ॥ ३ ॥ चुल्लिकायां निधायाथ पचेत्तीव्राग्निना भृशम् । जले शुष्के तलस्थञ्च नृसारं विमलं हरेत् ॥ ४ ॥ नवसादरशोधनम्—सरलप्रायम्। केचित्तु डमरूयन्त्रे मन्दाग्निना पातनेन शुद्धयति इत्याहुः ॥ ३–४ ॥ भा.टी.—एक भाग नौसादर को तीन भाग जल में घोलें, अच्छी तरह घुलने पर इसको कपड़े में छान कर एक पात्र में डाल अग्नि में रख कर तेज अग्नि से पकावें, जब जलीयांश उड़ जाय तो पात्रतल में लगे हुए नौसादर को एकत्र करके रख लें। यह शुद्ध नौसादर कहा जाता है ॥ ३–४ ॥ वक्तव्य—कई वैद्य नौसादर को डमरूयन्त्र में बन्द करके ऊपर उड़ा कर शुद्ध कर लेने को कहते हैं। नवसादरस्य गुणाः नवसारस्त्रिदोषघ्नः स्निग्धः सूक्ष्मो लघुस्तथा । पाचकः सारकस्तीक्ष्णो जठराग्निप्रदीपनः ॥ ५ ॥ उष्णः प्लीहप्रशमनो मांसाजीर्णनिवारणः । गुल्माध्मानप्रहरणः कफविश्लेषणः परमः ॥ ६ ॥