भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

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प्रस्तावना । ( ५ ) उन अनेक रसचिकित्साके ग्रंथोंमेंसे बडे परिश्रमसे श्रीगोपाल- कृष्ण भट्टने रसोंका संग्रह कर यह "रसेन्द्रसार संग्रह" नामक ग्रंथ बनाया । इसमें तीन खण्ड हैं-प्रथम खंडमें रस, उपरस, धातु, उपधातु, रत्न और विषादिकोंका शोधन मारण बहुत उत्तम रीतिसे लिखा है । दूसरे खण्डमें ज्वरादि संपूर्ण रोगोंकी चिकित्सा है और तीसरे खण्डमें आयु, बल और वीर्यवर्द्धक उत्तम २ योग हैं । इस प्रकार यह रसेन्द्र- सारसंग्रह नामक ग्रंथ तीन खण्डोंमें समाप्त हुआ है । ग्रंथके ऊपर श्रीहृदयनाथ कविरत्न कृत संस्कृत संदर्भ भी है। इतना सब होनेपर भी इस ग्रंथसे विद्वानोंको ही लाभ पहुँच सकता था । केवल भाषामात्र जाननेवालोंके लिये भाषानुवादके बिना कुछ उपाय ही न था ऐसा देख परमोदारचरित "श्रीवेंकटेश्वर" प्रेसके मालिक सेठ खेमराजजीने यह पुस्तक सरल हिन्दी अनुवादके लिये मेरे पास भेजा, मैंने अपनी मतिगतिके अनुसार इस ग्रंथकी भाषाटीका करनेके अतिरिक्त इसमें पुटविधान और मानविधि भी लगा दी है । यह जो कुछ और जैसा तैसा बना है श्रीमान् सेठ खेमराजजीके करकमलोंमें ही सर्वाधिकार सहित समर्पित करता हूं, इसके अनुवादमें यदि कहीं लेखका दोष रहा हो तो प्रेसके शास्त्री महाशय छपते समय शोधन करनेकी कृपा करेंगे । यदि विषयमें भ्रष्टता हुई हो तो भिषग्वर कृपापूर्वक शोधन कर मुझे भी सूचित करेंगे जिससे अग्रिमावृत्ति छपनेके समय वह दोष निकाल दिया जाय ॥ आपका विनीत सेवक- वैद्यरत्न रामप्रसाद, राजवैद्य पटियाला स्टेट.