रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
DevanagariHindipublished584 पृष्ठ
पृष्ठ 16, कुल 584 में से
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( २ ) रसेन्द्रसारसंग्रह-
| विषय. | पृष्ठांक. | विषय. | पृष्ठांक. |
|---|---|---|---|
| वज्राभ्रकके लक्षण | ३७ | अशुद्ध सोनामक्खीके दोष | ५४ |
| अशुद्ध अभ्रकके दोष | ” | सोनामक्खी शोधन | ५५ |
| अभ्रकके शोधनकी विधि | ३८ | माक्षिकभस्मविधि | ” |
| अभ्रकमारणविधि | ३९ | सोनामक्खीके गुण | ५६ |
| मारकगण (३-४-५ मारण ) | ४१ | काशीसशोधन काशीसके गुण | ” |
| छठी विधि। १० पुटी भस्म | ४२ | कान्तपाषाणके पर्याय | ५७ |
| सातवीं विधि। १०० पुटी भस्म | ” | कांतपाषाणका शोधन | ५९ |
| अभ्रक भस्मके गुण | ४३ | कौडीके भेद | ” |
| हरितालप्रकरण । | कौडियोंका शोधन | ५८ | |
| हरितालके पर्याय | ४३ | वराटिकाकी भस्मविधि | ” |
| हरितालके भेद | ” | वराटिकाभस्मके गुण | ” |
| अशुद्ध हरितालके दोष | ” | नीलांजन शोधन | ५९ |
| हरितालशोधन १-२-३ विधि | ४४ | हिंगुलप्रकरण । | |
| १ हरितालमारण विधि | ४५ | सिगरफके पर्यायनाम | ५९ |
| २-३ प्रकारान्तरसे मारण | ४६ | हिंगुलशोधनविधि | ” |
| मरे हुए हरितालकी परीक्षा | ४७ | हिंगुलके लक्षण और गुण | ६० |
| हरितालके गुण, माणिकरस | ” | शिलाजीतके नाम | ” |
| मनसिलके पर्याय | ४९ | शिलाजीतका शोधन | ६१ |
| उत्तम मनसिल | ” | शीलाजीतके गुण | ” |
| अशुद्ध मनसिलके दोष | ” | सौवीरादिकोंकी साधारण शुद्धि,, | |
| मनशिलशोधनविधि | ” | टङ्कण ( सुहागे ) के नाम | ” |
| मनसिलके गुण | ५० | सुहागेका शोधन | ६२ |
| खपरिया शोधनविधि | ” | सुहागेके गुण | ६३ |
| खपरियामारण, खपरियेके गुण | ५१ | शंखका शोधन और मारण गुण | ” |
| तुत्थप्रकरण । | स्वर्णादिधातुशोधनमारण । | ||
| नीलाथोथेका नाम | ५२ | सोना आदि ८ धातुओंकी | |
| तूतियाशोधनमारण | ” | साधारण शुद्धि | ६४ |
| विमलशोधन | ५३ | अशुद्धसुवर्णका दोष | ” |
| सोनामक्खीके नाम | ५४ | सुवर्णशोधन, पञ्चमृत्तिका | ६५ |
| उत्तम सुवर्णमक्खी | ” | सुवर्णभस्मकी विधि | ६६ |
| सुवर्णके गुण | ६७ |