रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविषयानुक्रमणिका। ( ५ ) विषय. पृष्ठांक. विषय. पृष्ठांक. अभिन्यासे-स्वच्छंदनायकरस १४९ भानुचूडामणि रस १७८ सन्निपातान्तक रस १५० बृहच्चूडामणि रस १७९ बृहज्ज्वरचूडामणि रस १८० जीर्णज्वर विषमज्वर चि०। ज्वरातिसारचिकित्सा । विषमज्वरलक्षण १५१ मृतसञ्जीवनी वटी १८१ जीर्णज्वरके लक्षण, ज्वरांकुश रस,, आनन्दभैरव रस ,, ज्वरारि-अभ्रक, ज्वराशनि रस १५२ अमृतार्णव १८२ अर्द्धनारीश्वर रस १५३ सिद्धप्राणेश्वर रस, अभ्रवटिका १८३ चन्दनादिलोह, ज्वरारि रस १५४ कनकसुन्दर रस, कनकप्रभा १८४ सर्वज्वर रस लोह १५६ कारुण्यसागर रस १८६ बृहत्सर्वज्वरहर लोह १५७ बृहत्कनकसुन्दर रस, मृतस- महाराजवटी १५९ ञ्जीवन १८७ चिन्तामणि रस १६० नागरादि चूर्ण, प्राणेश्वर रस १८९ त्रैलोक्यचिन्तामणि रस १६१ अतिसारचिकित्सा । बृहच्चिन्तामणि रस ,, अतिसारवारण रस १९० विषमज्वरान्तक लोह १६२ पूर्णचन्द्रोदय रस ,, कणाद्यलोह १९१ बृहद्विषमज्वरान्तक लोह १६३ बृहद्गगनसुन्दर रस ,, शीतभञ्जी रस १६४ लोकनाथ रस १९२ चिन्तामणि रस १६५ चिन्तामणि रस १९३ ज्वरांकुश रस, मेघनाद रस १६६ अहिफेनवटिका १९४ शीतज्वरहर रस,शीतभञ्जी रस १६७ महागन्धक ,, पञ्चानन रस १६८ सर्वाङ्गसुन्दर रस १९५ वमनयोग, विश्वेश्वर रस १६९ ग्रहणीरोगचिकित्सा । त्र्याहिकारि रस, चातुर्थिकारि० १७० जातीफलादि, ग्रहणीकपाट रस १९६ चिन्तामणि रस,बृहच्चिन्तामणि १७१ ग्रहणीकपाट रस ,, महाज्वरांकुश १७२ जातीफलाद्या वटिका १९७ तन्त्रान्तरोक्त महाज्वरांकुश १७३ पूर्णकला वटी १९९ सर्वतोभद्र रस १७४ वज्रकपाट रस, जातीफल रस २०० बृहज्ज्वरान्तक १७५ ग्रहणीगजेन्द्रवटिका २०१ चूडामणिरस १७७ पीयूषवल्लीरस २०२