ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1428, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंअपराजेय सोम इस तरह कलश में जाते हैं, जैसे युद्ध में कोई घोड़ा चलता है. (५) स देवः कविनेषितोऽभि द्रोणानि धावति. इन्दुरिन्द्राय मंहना.. (६) वे दीप्तिशाली, भीगे हुए, अध्वर्यु के द्वारा प्रेरित एवं महान् सोम अध्वर्यु की प्रेरणा से इंद्र के निमित्त द्रोणकलश में जाते हैं. (६) सूक्त—३८ देवता—सोम एष उ स्य वृषा रथोऽव्यो वारेभिरर्षति. गच्छन् वाजं सहस्रिणम्.. (१) अभिलाषापूरक सोम रथ के समान गतिशील होकर यजमान को हजारों अन्न देने के लिए भेड़ के बालों से बने दशापवित्र को पार करके कलश में जाते हैं. (१) एतं त्रितस्य योषणो हरिं हिन्वन्त्यद्रिभिः. इन्दुमिन्द्राय पीतये.. (२) त्रित ऋषि की उंगलियां इस भीगे हुए एवं हरे रंग के सोम को इंद्र के पीने के लिए पत्थरों से कुचल रही हैं. (२) एतं त्यं हरितो दश मर्मृज्यन्ते अपस्युवः. याभिर्मदाय शुम्भते.. (३) पकड़ने के स्वभाव वाली दस उंगलियां कर्म की इच्छुक बनकर सोम को निचोड़ रही हैं. इन उंगलियों द्वारा सोम इंद्र के नशे के लिए शुद्ध किए जाते हैं. (३) एष स्य मानुषीष्वा श्येनो न विक्षु सीदति. गच्छञ्जारो न योषितम्.. (४) ये सोम मानवप्रजाओं में बाज पक्षी के समान बैठते हैं. जैसे कोई यार अपनी प्रेयसी के पास चुपचाप जाता है, उसी प्रकार सोम करते हैं. (४) एष स्य मद्यो रसोऽव चष्टे दिवः शिशुः. य इन्दुर्वारेमाविशत्.. (५) स्वर्ग के पुत्र वे सोम मादक रस के रूप में सबको देखते हैं तथा दीप्त सोम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र में प्रवेश करते हैं. (५) एष स्य पीतये सुतो हरिरर्षति धर्णसिः. क्रन्दन्योनिमभि प्रियम्.. (६) ये पीने के लिए निचोड़े गए, हरे रंग के एवं सबके धारक सोम शब्द करते हुए अपने प्रिय स्थान द्रोणकलश में जाते हैं. (६) सूक्त—३९ देवता—सोम ebook converter DEMO Watermarks*