ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 319, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंअग्नि को धारण किया है. (२) तमीळत प्रथमं यज्ञसाधं विश आरीराहुतमृञ्जसानम्. ऊर्जः पुत्रं भरतं सृप्रदानुं देवा अग्निं धारयन्द्रविणोदाम्.. (३) हे मनुष्यो! देवों में प्रमुखतया यज्ञसाधक, हव्य द्वारा आहूत, स्तोत्रों द्वारा प्रसन्न, अन्न के पुत्र, प्रजाओं के पोषक एवं दानशील स्वामी अग्नि के समीप जाकर उनकी स्तुति करो. ऋत्विजों ने धनदाता अग्नि को धारण किया है. (३) स मातरिश्वा पुरुवारपुष्टिर्विदद्गातुं तनयाय स्वर्वित्. विशां गोपा जनिता रोदस्योर्देवा अग्निं धारयन्द्रविणोदाम्.. (४) अंतरिक्ष में वर्तमान अग्नि हमारे पुत्रों के लिए अनेक अनुष्ठान मार्ग प्राप्त करावें. वे वरणीय पुष्टि वाले, स्वर्गदाता, प्रजाओं के रक्षक, देव, धरती और आकाश के उत्पन्नकर्त्ता हैं. ऋत्विजों ने धनदाता अग्नि को धारण किया है. (४) नक्तोषासा वर्णमामेम्याने धापयेते शिशुमेकं समीची. द्यावाक्षामा रुक्मो अन्तर्वि भाति देवा अग्निं धारयन्द्रविणोदाम्.. (५) दिन और रात बार-बार एक-दूसरे का रूप नष्ट करके मिलते हुए अग्नि रूपी एक ही बालक का पालन करते हैं. वे तेजस्वी अग्नि, धरती और आकाश के मध्य में विशेष रूप से प्रकाशित होते हैं. ऋत्विजों ने धनदाता अग्नि को धारण किया है. (५) रायो बुध्नः संगमनो वसूनां यज्ञस्य केतुर्मन्मसाधनो वेः. अमृतत्वं रक्षमाणास एनं देवा अग्निं धारयन्द्रविणोदाम्.. (६) अपने अमृतत्व की रक्षा करने वाले देवों ने धन के मूल निवास हेतु, धनों को मिलाने वाले, स्तोताओं की अभिलाषा के पूरक तथा यज्ञ के केतुरूप धनदाता अग्नि को धारण किया था. (६) नू च पुरा च सदनं रयीणां जातस्य च जायमानस्य च क्षाम्. सतश्च गोपां भवतश्च भूरेर्देवा अग्निं धारयन्द्रविणोदाम्.. (७) प्राचीनकाल में एवं आजकल होने वाले समस्त धनों के निवासस्थान, उत्पन्न एवं भविष्य में होने वाले कार्यसमूह के निवासभूत तथा इस समय उपस्थित एवं भविष्य में जन्म लेने वाले पदार्थों के रक्षक तथा धनदाता अग्नि को देवों ने धारण किया. (७) द्रविणोदा द्रविणसस्तुरस्य द्रविणोदाः सनरस्य प्र यंसत्. द्रविणोदा वीरवतीमिषं नो द्रविणोदा रासते दीर्घमायुः.. (८) ebook converter DEMO Watermarks*