ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 320, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंधन देने वाले अग्नि हमें स्थावर एवं जंगम संपत्ति का एक अंश दें. वे हमें वीर पुरुषों से युक्त अन्न एवं दीर्घ आयु दें. (८) एवा नो अग्ने समिधा वृधानो रेवत्पावक श्रवसे वि भाहि. तन्नो मित्रो वरुणो मामहन्तामदितिः सिन्धुः पृथिवी उत द्यौः.. (९) हे पवित्र करने वाले अग्नि! समिधाओं के कारण प्रज्वलित होकर हमें धनयुक्त अन्न देने के लिए विशेष रूप से प्रकाशित बनो. मित्र, वरुण, अदिति, सिंधु, धरती और आकाश उस अन्न की पूजा करें. (९) सूक्त—९७ देवता—अग्नि अप नः शोशुचदघमग्ने शुशुग्ध्या रयिम्. अप नः शोशुचदघम्.. (१) हे अग्नि! हमारा पाप नष्ट हो. तुम हमारे धन को सब ओर से प्रकाशित करो. हमारा पाप नष्ट हो. (१) सुक्षेत्रिया सुगातुया वसूया च यजामहे. अप नः शोशुचदघम्.. (२) हे अग्नि! हम शोभन क्षेत्र, शोभन मार्ग और धन की इच्छा से हवि द्वारा तुम्हारी पूजा करते हैं. हमारा पाप नष्ट हो. (२) प्र यद्भन्दिष्ठ एषां प्रास्माकासश्च सूरयः. अप नः शोशुचदघम्.. (३) हे अग्नि! हमारे स्तोता कुत्स के समान श्रेष्ठ हों. वे सभी स्तोताओं में उत्तम हैं. हमारा पाप नष्ट हो. (३) प्र यत्ते अग्ने सूरयो जायेमहि प्र ते वयम्. अप नः शोशुचदघम्.. (४) हे अग्नि! तुम्हारी स्तुति करने वाले पुत्र-पौत्रादि पाकर बढ़ते हैं, इसीलिए हम भी तुम्हारी स्तुति करके बढ़ें. हमारे पाप नष्ट हों. (४) प्र यदग्नेः सहस्वतो विश्वतो यन्ति भानवः. अप नः शोशुचदघम्.. (५) शत्रुओं को पराजित करने वाली अग्नि की किरणें सभी जगह जाती हैं, इसलिए हमारे पाप नष्ट हों. (५) त्वं हि विश्वतोमुख विश्वतः परिभूरसि. अप नः शोशुचदघम्.. (६) हे अग्नि! तुम्हारे मुख चारों ओर हैं, इसलिए तुम चारों ओर से हमारी रक्षा करो. हमारा पाप नष्ट हो. (६) ebook converter DEMO Watermarks*