ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 536, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंविश्वं तद्भद्रं यदवन्ति देवा बृहद्वदेम विदथे सुवीरा:.. (१६) हे ब्रह्मणस्पति! तुम इस विश्व का नियंत्रण करने वाले हो. तुम इस सूक्त को जानो एवं हमारी संतान को प्रसन्न करो. देवगण जिसकी रक्षा करते हैं, वह सभी कल्याण प्राप्त करता है. हम शोभन पुत्र एवं पौत्र प्राप्त करके इस यज्ञ में बहुत सी स्तुतियां बोलेंगे. (१६) सूक्त—२५ देवता—ब्रह्मणस्पति इन्धानो अग्निं वनवद्धनुष्यतः कृतब्रह्मा शूशुवद्वातहव्य इत्. जातेन जातमति स प्र सर्सृते यंयं युजं कृणुते ब्रह्मणस्पति:.. (१) यज्ञ अग्नि को प्रज्वलित करता हुआ यजमान हिंसक शत्रुओं का नाश करे. स्तोत्र पढ़ने वाले एवं हव्य देने वाले यजमान वृद्धि प्राप्त करें. ब्रह्मणस्पति जिस-जिस यजमान को मित्र के रूप में स्वीकार कर लेते हैं, वह अपने पुत्र के पुत्र अर्थात् पौत्र से भी अधिक दिन तक जीता है. (१) वीरेभिर्वीरान्वनवद्वनुष्यतो गोभी रयिं पप्रथद्बोधति त्मना. तोकं च तस्य तनयं च वर्धते यंयं युजं कृणुते ब्रह्मणस्पति:.. (२) यजमान अपने वीर पुत्रों की सहायता से हिंसक शत्रुओं की हिंसा करे. वह गायरूप धन का विस्तार करता है एवं स्वयं ही सब कुछ समझता है. ब्रह्मणस्पति जिस-जिस यजमान को मित्र के रूप में स्वीकार कर लेते हैं, वह अपने पुत्र तथा पौत्र से भी अधिक दिन तक जीता है. (२) सिन्धुर्न क्षोदः शिमीवाँ ऋघायतो वृषेव वध्रीँ रभि वष्ट्योजसा. अग्नेरिव प्रसितिर्नाह वर्तवे यंयं युजं कृणुते ब्रह्मणस्पति:.. (३) बृहस्पति की सेवा करने वाला यजमान किनारों को तोड़ने वाली सरिता एवं साधारण बैलों को हराने वाले सांड के समान शत्रुओं को अपनी शक्ति से पराजित करता है. ब्रह्मणस्पति जिस-जिस यजमान को मित्र कहकर स्वीकार कर लेते हैं, वह प्रज्वलित अग्नि के समान रोका नहीं जा सकता. (३) तस्मा अर्षन्ति दिव्या असश्चतः स सत्वभिः प्रथमो गोषु गच्छति. अनिभृष्टतविषिर्हन्त्योजसा यंयं युजं कृणुते ब्रह्मणस्पति:.. (४) स्वर्गीय जल उसके पास न रुकने वाली सरिता के समान आता है, वह सभी सेवकों से पहले गायें प्राप्त करता है एवं अपने अकरणीय बल से शत्रुओं को नष्ट करता है, जिसे ब्रह्मणस्पति मित्र कहकर स्वीकार कर लेते हैं. (४) ebook converter DEMO Watermarks*