ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 543, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहटा दो. हे मित्र और वरुण! मैं तुम्हारे द्वारा किए हुए मंगल कार्यों को जानता हूं. मैं तुम्हें रक्षा के लिए बुलाता हूं. तुम मेरी पुकार सुनो. (१) यूयं देवाः प्रमतिर्यूयमोजो यूयं द्वेषांसि सनुतर्युयोत. अभिक्षत्तारो अभि च क्षमध्वमद्या च नो मृळयतापरं च.. (२) हे देवो! तुम उत्तम बुद्धि एवं बलसंपन्न हो. तुम हमारे विरोधियों को गुप्त स्थान में ले जाओ. हे शत्रुनाशक देवो! तुम भी हमारे शत्रुओं को हराओ एवं आज तथा आने वाले कल में सुखी करो. (२) किमूं नु वः कृणवामापरेण किं सनेन वसव आप्येन. यूयं नो मित्रावरुणादिते च स्वस्तिमिन्द्रामरुतो दधात.. (३) हे देवो! हम आज या आने वाले दिनों में तुम्हारा कौन सा कार्य कर सकते हैं? अर्थात् कोई नहीं. हम सनातन प्राप्तव्य कार्य द्वारा भी कुछ नहीं कर सकते. हे मित्र, वरुण, अदिति, इंद्र एवं मरुद्गण! हमारा कल्याण करो. (३) हये देवा यूयमिदापयः स्थ ते मृळत नाधमानाय मह्यम्. मा वो रथे मध्यमवाळ्ते भून्मा युष्मावत्स्वापिषु श्रमिष्म.. (४) हे देवो! तुम्हीं हमारे बांधव हो. प्रार्थना करने वाले हम लोगों को तुम सुख दो. हमारे यज्ञ में आते समय तुम्हारे रथ की गति मंद न हो. तुम बांधवों के होते हुए हम परेशान न हों. (४) प्र व एको मिमय भूर्यागो यन्मा पितेव कितवं शशास. आरे पाशा आरे अघानि देवा मा माधि पुत्रे विमिव ग्रभीष्ट.. (५) हे देवगण! मैंने मनुष्य होते हुए भी तुम लोगों के बीच रहकर अपने बहुत से पाप नष्ट किए हैं. जिस प्रकार पिता कुमार्गगामी पुत्र को रोकता है, उसी प्रकार तुमने मुझे अनुशासन में रखा है. हे देवो! मुझे बंधन और पाप से दूर रखो. व्याध जिस प्रकार पुत्र के सामने पक्षी पिता को मारता है, उसी प्रकार मुझे मत मारना. (५) अर्वाञ्चो अद्या भवता यजत्रा आ वो हार्दि भयमानो व्ययेयम्. त्राध्वं नो देवा निजुरो वृकस्य त्राध्वं कर्तादवपदो यजत्राः.. (६) हे यज्ञ योग्य देवो! इस समय हमारे सामने आओ. मैं डरता हुआ तुम्हारे हृदय में आश्रय पाऊं. हे देवो! भेड़िए की हिंसा से हमें बचाओ. हे यज्ञपात्रो! हमें विपत्ति में डालने वालों से बचाओ. (६) माहं मघोनो वरुण प्रियस्य भूरिदाव्न आ विदं शूनमापेः. मा रायो राजन्त्सुयमादव स्थां बृहद्वदेम विदथे सुवीराः.. (७) ebook converter DEMO Watermarks*