रोगी रोग मुक्त बिना दवाई: योगासन एवं प्राणायाम
Rogi Rog Mukt Bina Dawai: Yogasan evam Pranayama
by राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना
Source: Swadeshi Chikitsa & Yogasan Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (origin)
रोगी रोग मुक्त
बिना दवाई
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सहयोग राशि - 80 रुपये
रोगी रोग मुक्त
बिना दवाई
रोग मुक्त होना है, तो हमें योग की शरण में जाना ही होगा। योग का मतलब है योगासन। इसलिए आसन करें, निरोग रहें और खुश रहें।
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योग क्या है?
योग सही तरह से जीने का विज्ञान है और इस लिए इस दैनिक जीवन में शामिल किया जाना चाहिए। यह व्यक्ति के सभी पहलुओं पर काम करता है: भौतिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक।
योग का अर्थ 'एकता' या 'बांधना' है। इस शब्द की जड़ है संस्कृत शब्द 'युज', जिसका मतलब है 'जुड़ना'। आध्यात्मिक स्तर पर इस जुड़ने का अर्थ है सार्वभौमिक चेतना के साथ व्यक्तिगत चेतना का एक होना। व्यावहारिक स्तर पर, योग शरीर, मन और भावनाओं को संतुलित करने और तालमेल बनाने का एक साधन है। यह योग या एकता आसन, प्राणायाम, मुद्रा, बँध, षट्कर्म और ध्यान के अभ्यास के माध्यम से प्राप्त होती है। तो योग जीने का एक तरीका भी है और अपने आप में परम उद्देश्य भी।
योग सबसे पहले लाभ पहुँचाता है बाहरी शरीर (फिज़िकल बॉडी) को, जो ज्यादातर लोगों के लिए एक व्यावहारिक और परिचित शुरूआती जगह है। जब इस स्तर पर असंतुलन का अनुभव होता है, तो अंग, मांसपेशियों और नसें सन्नाव में काम नहीं करते हैं, बल्कि वे एक-दूसरे के विरोध में कार्य करते हैं।
बाहरी शरीर (फिज़िकल बॉडी) के बाद योग मानसिक और भावनात्मक स्तरों पर काम है। रोज़मर्रा की जिंदगी के तनाव और बातचीत के परिणामस्वरूप बहुत से लोग अनेक मानसिक परेशानियों से पीड़ित हैं। योग इनका इलाज शायद नहीं प्रदान करता लेकिन इनसे मुकाबला करने के लिए यह सिद्ध विधि है।
योग के लाभ -
शारीरिक और मानसिक उपचार योग के सबसे अधिक ज्ञात लाभों में से एक है। यह इतना शक्तिशाली और प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह सन्नाव और एकीकरण के सिद्धांतों पर काम करता है।
योग अस्थमा, मधुमेह, रक्तचाप, गठिया, पाचन विकार और अन्य बीमारियों में चिकित्सा के एक सफल विकल्प है, खास तौर से वहाँ जहाँ आधुनिक विज्ञान
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आजतक उपचार देने में सफल नहीं हुआ है। एचआईवी (HIV) पर योग के प्रभावों पर अनुसंधान वर्तमान में आशाजनक परिणामों के साथ चल रहा है। चिकित्सा वैज्ञानिकों के अनुसार, योग चिकित्सा तंत्रिका और अंतःस्नावी तंत्र में बनाए गए संतुलन के कारण सफल होती है जो शरीर के अन्य सभी प्रणालियों और अंगों को सीधे प्रभावित करती है।
योग करने के नियम
- • सूर्योदय या सूर्यास्त के वक्रत योग का सही समय है।
- • योग करने से पहले स्नान जरूर करें।
- • योग खाली पेट करें। योग करने से 2 घंटे पहले कुछ ना खायें।
- • आरामदायक सूती कपड़े पहनें।
- • तन की तरह मन भी स्वच्छ होना चाहिए -- योग करने से पहले सब बुरे खयाल दिमाग से निकाल दें।
- • किसी शांत वातावरण और साँफ जगह में योग अभ्यास करें।
- • अपना पूरा ध्यान अपने योग अभ्यास पर ही केंद्रित रखें।
- • योग अभ्यास धैर्य और दृढ़ता से करें।
- • अपने शरीर के साथ जबरदस्ती बिल्कुल ना करें।
- • धीरज रखें, योग के लाभ महसूस होने में वक्रत लगता है।
- • निरंतर योग अभ्यास जारी रखें।
- • योग करने के 30 मिनट बाद तक कुछ ना खायें। 1 घंटे तक ना नहायें।
- • प्राणायाम हमेशा आसन अभ्यास के बाद करें।
- • अगर कोई मेडिकल तकलीफ़ हो तो पहले डॉक्टर से जरूर सलाह करें।
- • अगर तकलीफ़ बढ़ने लगे या कोई नई तकलीफ़ हो जाए तो तुरंत योग अभ्यास रोक दें।
- • योगाभ्यास के अंत में हमेशा शवासन करें।
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सुबह सूर्योदय से पहले एक से दो घंटे योग के लिए सबसे अच्छा समय है। अगर सुबह आपके लिए मुमकिन ना हो तो सूर्यास्त के समय भी कर सकते हैं। इसके अलावा इन बातों का भी खास ध्यान रखें:-
- • अगर दिन का कोई समय योग के लिए निर्धारित कर लें, तो यह उत्तम होगा।
- • सब आसन किसी योगा मैट या दरी बिछा कर ही करें।
- • आप योग किसी खुली जगह जैसे पार्क में कर सकते हैं, या घर पर भी। बस इतना ध्यान रहे की जगह ऐसी हो जहाँ आप खुल कल साँस ले सकें।
❖ पेट की बिमारियों में –
1. उत्तानपादासन
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2. पवनमुक्तासन
3. वज्रासन
4. योगमुद्रासन
5. भुजंगासन
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भुजंगासन
6. मत्स्यासन
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सिर की बिमारियों में -
1. सर्वांगासन -
2. शीर्षासन -
3. चन्द्रासन-
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❖ मधुमेह के लिए योग –
1. पश्चिमोत्तानासन–
2. नौकासन -
3. वज्रासन
4. भुजंगासन
भुजंगासन
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5. हलासन
A person is lying on their back on a blue mat. Their legs are raised and bent at the knees, with their feet resting on the floor. They are wearing a light blue top and grey leggings.
6. शीर्षासन
A person is performing a headstand (Shirshasana). They are standing on their head with their legs raised vertically. They are wearing a black top and black shorts.
❖ वीर्यदोष के लिए योग –
1. सर्वांगासन –
A cartoon illustration of a person performing Sarvangasana. They are lying on their back with their legs raised and bent at the knees, feet resting on the floor. They are wearing a red top and red shorts.
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2. वज्रासन -
3. योगमुद्रा -
❖ गले के लिए योग -
1. सुप्तवज्रासन -
2. भुजंगासन -
भुजंगासन
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3. चन्द्रासन -
❖ आंखों के लिए योग-
1. सर्वांगासन -
2. शीर्षासन -
3. चक्रासन-
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4. भुजंगासन -
❖ गठिया के लिए योग -
1. पवनमुक्तासन
2. पद्मासन
3. सुसवज्जासन -
4. मत्स्यासन
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5. उद्घासन
❖ नाभि के लिए योग –
1. धनुरासन
धनुरासन
2. नाभिआसन
नाभिआसन
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भुजंगासन
3. भुजंगासन
❖ गर्भाशय के लिए योग –
1. उत्तनपादासन
2. भुजंगासन
3. सर्वांगासन
4. ताड़ासन
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❖ कमर दर्द के लिए –
1. हलासन
2. भुजंगासन
भुजंगासन
3. चक्रासन
(चक्रासन)
4. धनुरासन
धनुरासन
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❖ फेफड़े के लिए -
1. वज्रासन
A line drawing showing two views of a person performing Vajrasana. On the left, the person is kneeling with their back straight and hands resting on their thighs. On the right, the person is kneeling with their back straight and hands resting on their thighs, viewed from the side.
A line drawing of a person lying on their back on a mat. Their legs are crossed at the ankles, and their hands are resting on their thighs. The person is wearing a striped shirt and shorts. The number 'III' is written in red below the person's feet.
2. मत्स्यासन
3. सर्वांगासन
A color illustration of a person performing Sarvangasana. The person is lying on their back on a green mat, with their legs straight up in the air. Their hands are placed on their feet, and their head is resting on the floor. The person is wearing a red top and blue shorts.
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❖ यकृत के लिए –
1.लतासन -
2.पवनमुक्तासन
3.यानासन –
यानासन / शलभासन के लाभ और विधि
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❖ गुदा,बवासीर,भंगदर आदि में –
1.उत्तनपादासन
2.जानुशिरासन -
3.यानासन –
4. सर्वांगासन –
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❖ दमा के लिए-
1.सुप्तवज्रासन -
2.मत्स्यासन -
III
3.भुजंगासन -
भुजंगासन
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