भारतकोश
श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी (परिशिष्टसहित)

श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी (परिशिष्टसहित)

Shrimad Bhagavad Gita Sadhak Sanjeevani

स्वामी रामसुखदास द्वारा

स्रोत: संवर्धित नब्बेवाँ संस्करण (90th Edition), गीता प्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस, गोरखपुर · 2008 (उद्गम)

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श्लोक-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
दुर्लभता बताना और भयभीत अर्जुनको आश्वासन देना.....७८८—७९५
(विशेष बात ७८९; संजय और अर्जुनकी दिव्यदृष्टि कबतक रही? ७९२)
५१—५५भगवान्के द्वारा चतुर्भुजरूपकी महत्ता और उसके दर्शनका उपाय बताना.....७९५—८०२
(विशेष बात ८००, ८०१)
ग्यारहवें अध्यायके पद, अक्षर और उवाच ...८०२
ग्यारहवें अध्यायमें प्रयुक्त छन्द .....८०२
बारहवाँ अध्याय
१—१२सगुण और निर्गुण-उपासकोंकी श्रेष्ठताका निर्णय और भगवत्प्राप्तिके चार साधनोंका वर्णन .....८०३—८३६
(विशेष बात ८११; विशेष बात—सगुण-उपासनाकी सुगमताएँ और निर्गुण-उपासनाकी कठिनताएँ ८१६; विशेष बात ८२३; भगवत्प्राप्ति-सम्बन्धी विशेष बात ८२५; कर्मफलत्याग-सम्बन्धी विशेष बात ८३३; साधन-सम्बन्धी विशेष बात ८३५)
१३—२०सिद्ध-भक्तोंके उन्तालीस लक्षणोंका वर्णन .....८३६—८५७
(मामिक बात ८५१; प्रकरण-सम्बन्धी विशेष बात ८५२)
बारहवें अध्यायके पद, अक्षर और उवाच... ८५७
बारहवें अध्यायमें प्रयुक्त छन्द .....८५७
तेरहवाँ अध्याय
१—१८क्षेत्र, क्षेत्रज्ञ (जीवात्मा), ज्ञान और ज्ञेय (परमात्मा)-का भक्ति-सहित विवेचन .....८५९—८९२
(मामिक बात ८६१; विशेष बात ८६८, ८६९, ८७२, ८८०)
१९—३४ज्ञानसहित प्रकृति-पुरुषका विवेचन ८९२—९१४
(मामिक बात ९०४)
तेरहवें अध्यायके पद, अक्षर और उवाच .....९१४
तेरहवें अध्यायमें प्रयुक्त छन्द .....९१४
चौदहवाँ अध्याय
१—४ज्ञानकी महिमा और प्रकृति-पुरुषसे जगत्की उत्पत्ति .....९१५—९१९
५—१८सत्त्व, रज और तम—इन तीनों
श्लोक-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
गुणोंका विवेचन .....९१९—९३९
(विशेष बात ९२०, ९२६; मामिक बात ९३१; विशेष बात ९३६, ९३८)
१९—२७भगवत्प्राप्तिका उपाय एवं गुणातीत पुरुषके लक्षण.....९३९—९५०
(विशेष बात ९४३)
चौदहवें अध्यायके पद, अक्षर और उवाच .....९५०
चौदहवें अध्यायमें प्रयुक्त छन्द .....९५०
पंद्रहवाँ अध्याय
१—६संसार-वृक्षका तथा उसका छेदन करके भगवान्के शरण होनेका और भगवद्भ्रामका वर्णन .....९५१—९७१
(विशेष बात ९५९; वैराग्य-सम्बन्धी विशेष बात ९६०; संसारसे सम्बन्ध-विच्छेदके कुछ सुगम उपाय ९६१; विशेष बात ९६७, ९६८)
७—११जीवात्माका स्वरूप तथा उसे जानने-वाले और न जानेवालेका वर्णन... ९७२—९९०
(विशेष बात ९७४, ९८१, ९८२; मामिक बात ९८४, ९८७)
१२—१५भगवान्के प्रभावका वर्णन.....९९०—९९९
(परमात्मप्राप्ति-सम्बन्धी विशेष बात ९९५; प्रकरण-सम्बन्धी विशेष बात ९९७; मामिक बात ९९९)
१६—२०क्षर, अक्षर और पुरुषोत्तमका वर्णन तथा अध्यायका उपसंहार... ९९९—१००९
(मामिक बात १००२; विशेष बात १००४) पंद्रहवें अध्यायके पद, अक्षर और उवाच .....१००९
पंद्रहवें अध्यायमें प्रयुक्त छन्द .....१००९
पंद्रहवें अध्यायका सार.....१००९—१०१०
सोलहवाँ अध्याय
१—५फलसहित दैवी और आसुरी सम्पत्तिका वर्णन.....१०१२—१०३४
(मामिक बात १०२८, १०३०)
६—८सत्कर्मोंसे विमुक्त हुए आसुरी-सम्पत्तिवाले मनुष्योंकी मान्यताओं-का कथन .....१०३५—१०४१
(विशेष बात १०३९)
९—१६आसुरी-सम्पत्तिवाले मनुष्योंके दुराचारों और मनोरथोंका फल-सहित वर्णन .....१०४१—१०४९
१७—२०आसुरी-सम्पत्तिवाले मनुष्योंके