सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 253, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंअनु मातरं पृथिवीं वि वावृते तस्थौ नाकस्य शर्मणि.. (५) अग्नि उत्कृष्ट स्वर्गलोक में निवास करते हैं. वे इंद्र जैसी सामर्थ्य वाले हैं. वे पृथ्वी माता पर श्रेष्ठ यज्ञ कार्य पूर्ण कराते हैं. वे स्वर्गिक सुख प्रदान करते हैं. (५) अग्न आयू षि पवस आ सुवोर्जमिषं च न:. आरे बाधस्व दुच्छुनाम्.. (६) हे अग्नि! आप हमें दीर्घायु बनाइए. आप हमें श्रेष्ठ अन्न, बल दीजिए. आप दुष्टों को बाधित कीजिए. (६) अग्निर्र्ऋषि पवमान: पाञ्चजन्य: पुरोहित:. तमीमहे महागयम्.. (७) अग्नि ऋषि हैं. वे पवित्र, पुरोहित, पंच व सर्वद्रष्टा हैं. हम उन के गुण गाते हैं. (७) अग्ने पवस्व स्वपा अस्मे वर्च: सुवीर्यम्. दधद्रयिं मयि पोषम्.. (८) हे अग्नि! आप पोषक अन्न व धन धारण करिए. आप हमें शक्ति व श्रेष्ठ संतान दीजिए और पवित्र बनाइए. (८) अग्ने पावक रोचिषा मन्द्रया देव जिह्वया. आ देवान्वक्षि यक्षि च.. (९) हे अग्नि! आप पवित्र एवं देवताओं को खुश रखने वाले हैं. आप अपनी जिह्वाओं (लपटों) से देवताओं को बुलाइए और देवताओं के लिए यज्ञ कराइए. (९) तं त्वा घृतस्नवीमहे चित्रभानो स्वर्द्दशम्. देवाँ आ वीतये वह.. (१०) हे अग्नि! आप सर्वद्रष्टा हैं. हम आप को घी से सींचते हैं. आप अद्भुत हैं. हम आप से देवताओं का आह्वान करने के लिए निवेदन करते हैं. (१०) वीतिहोत्रं त्वा कवे द्युमन्त समिधीमहि. अग्ने बृहन्तमध्वरे.. (११) हे अग्नि! आप बुद्धिमान, यज्ञप्रेमी हैं और द्युतिमान हैं. हम विशाल यज्ञ में आप को समिधाओं से प्रज्वलित करते हैं. (११) चौथा खंड अवा नो अग्न ऊतिभिर्गायत्रस्य प्रभर्मणि. विश्वासु धीषु वन्द्य.. (१) हे अग्नि! आप की सभी यज्ञों में बुद्धिपूर्वक वंदना की जाती है. आप गायत्री छंद में स्तुति गाने पर प्रसन्न होते हैं. आप अपने रक्षा साधनों से हमारी रक्षा करने की कृपा कीजिए. (१) आ नो अग्ने रयिं भर सत्रासाहं वरेण्यम्. विश्वासु पृत्सु दुष्टरम्.. (२) हे अग्नि! आप भरपूर धन दीजिए. आप शत्रुनाशक श्रेष्ठ सामर्थ्य दीजिए. आप सभी ebook converter DEMO Watermarks*