सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 256, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंपंद्रहवां अध्याय पहला खंड कस्ते जामिर्जनानामग्ने को दाश्वध्वरः. को ह कस्मिन्नसि श्रितः.. (१) हे अग्नि! मनुष्यों में कौन आप का सगा, पथ प्रदर्शक, यज्ञकर्त्ता व आप के स्वरूप का ज्ञाता है? आप का आश्रय कहां है? (१) त्वं जामिर्जनानामग्ने मित्रो असि प्रियः. सखा सखिभ्य ईड्यः.. (२) हे अग्नि! मनुष्यों में कौन आप का मित्र है, प्रिय है? सखा सखियों में कौन आप को सर्वाधिक प्रिय है? (२) यजा नो मित्रावरुणा यजा देवाँ ऋतं बृहत्. अग्ने यक्षि स्वं दमम्.. (३) हे अग्नि! आप हमारे लिए मित्र और वरुण की पूजा करने की कृपा कीजिए. आप बहुत से देवताओं की पूजा करने की कृपा कीजिए. आप यज्ञ की पूजा कीजिए. (३) ईडेन्यो नमस्यस्तिरस्तमा २४ सि दर्शतः. समग्निरिध्यते वृषा.. (४) हे अग्नि! आप पूजनीय, नमन के योग्य, तमहारी व दर्शनीय हैं. आप को समिधाओं से भलीभांति प्रज्वलित किया जाता है. (४) वृषो अग्निः समिध्यते ऽ श्चो न देववाहनः. त २४ हविष्मन्त ईडते.. (५) हे अग्नि! आप शक्तिशाली हैं. घोड़े जैसे वाहन को ले जाते हैं, वैसे ही आप देवताओं के वाहन को ले जाते हैं. हे हविमान! आप हमारी प्रार्थनाएं स्वीकारिए. (५) वृषणं त्वा वयं वृषन्वृषणः समिधीमहि. अग्ने दीद्यतं बृहत्.. (६) हे अग्नि! आप शक्तिमान हैं. हम शक्तिमान आप को प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं. हम समिधाओं से आप को प्रज्वलित करते हैं. आप दीप्तिमान व विशाल हैं. (६) उत्ते बृहन्तो अर्चयः समिधानस्य दीदिवः. अग्ने शुक्रासि ईरते.. (७) हे अग्नि! हम समिधाओं से आप को प्रज्वलित करते हैं. हमारी अधिक अर्चना से आप ज्वालाओं से बढ़ोत्तरी प्राप्त करते हैं. (७) उप त्वा जुह्वो ३ मम घृताचीर्यन्तु हर्यत. अग्ने हव्या जुषस्व नः.. (८) ebook converter DEMO Watermarks*