भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 289, कुल 310 में से

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पृष्ठ 289

समानो अध्वा स्वस्रोरनंतस्तमन्यान्या चरतो देवशिष्टे. न मेथेते न तस्थतुः सुमेके नक्तोषासा समनसा विरूपे.. (६) दोनों बहनों (उषा और रात्रि) की एक ही राह है. वह राह अनंत है. उसी राह पर ये दोनों एकदूसरे के पीछे चलती हैं, भले ही इन के स्वरूप एकदूसरे से अलग हैं पर इन के मन समान हैं. ये दोनों अपनेअपने कार्यों में लगी रहती हैं. (६) आ भात्यग्निरुषसामनीकमुद्विप्राणां देवया वाचो अस्थुः. अर्वाञ्चा नून १४ रथ्येह यातं पीपिवा १४ समश्विना घर्ममच्छ.. (७) अग्नि प्रज्वलित हो गए हैं. उषा के प्रकट होते ही अग्नि प्रज्वलित हो जाते हैं. दिव्य प्रार्थनाएं शुरू हो गई हैं. अश्विनीकुमार रथ में विराज गए हैं. हम उन से सोमरस पीने के लिए यज्ञ में पधारने का अनुरोध करते हैं. (७) न स १४ स्कृतं प्र मिमीतो गिमष्ठान्ति नूनमश्विनोपस्तुतेह. दिवाभिपित्वे ऽ वसागमिष्ठा प्रत्यवतिं दाशुषे शम्भविष्ठा.. (८) हे अश्विनीकुमारो! आप परिष्कृत पदार्थों को ग्रहण करने की कृपा कीजिए. यज्ञस्थान के समीप आने वाले आप के लिए उपासना की जाती है. दिन के आते ही आप प्रतिष्ठित हो जाते हैं. आप यजमान को प्रतिष्ठा प्राप्त कराने की कृपा कीजिए. (८) उता यात १४ संगवे प्रातरह्नो मध्यन्दिन उदिता सूर्यस्य. दिवा नक्तमवसा शन्तमेन नेदानीं पीतिरश्विना ततान.. (९) हे अश्विनीकुमारो! सूर्य उगने के समय, दिन के मध्य में, शाम और दिन रात में आप पधारिए. आप अपने रक्षा साधनों सहित पधारने की कृपा कीजिए. आप के ये साधन दिनरात सुखदायी हैं. अभी तक आप के बिना सोमरस पीने का कार्य शुरू नहीं किया गया है. (९) पांचवां खंड एता उ त्या उषसः केतुमक्रत पूर्वे अर्धे रजसो भानुमञ्जते. निष्कृण्वाना आयुधानीव धृष्णवः प्रति गावो ऽ रुषीर्यन्ति मातरः.. (१) हे उषा! आप उजाला फैलाती हैं. आप के आने से पूर्व दिशा में प्रकाश हो जाता है. वीर अपने आयुधों को जैसे चमकाते हैं, वैसे ही आप संसार को चमचमा देती हैं. माता उषा प्रतिदिन आती और जाती हैं. (१) उदपप्तन्नरुणा भानवो वृथा स्वायुजो अरुषीर्गा अयुक्त. अक्रन्नुषासो वयुनानि पूर्वथा रुशन्तं भानुमरुषीरशिश्रयुः.. (२) उषा के आते ही लाल किरणें आकाश में छा गई हैं. अपनेआप जुते हुए रथ से वे चेतना ebook converter DEMO Watermarks*