भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 290, कुल 310 में से

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पृष्ठ 290

फैलाती हैं तथा सूर्य की सेवा करती हैं. (२) अर्चन्ति नारीरपसो न विष्टिभिः समानेन योजनेना परावतः. इषं वहन्तीः सुकृते सुदानवे विश्वेदह यजमानाय सुन्वते.. (३) जो यजमान अर्चना करते हैं, सोमरस को परिष्कृत करते हैं, अच्छे कार्य करते हैं, दान करते हैं, उन यजमानों को उषा अन्न व बल देती हैं और प्रकाशमान बना देती हैं. युद्ध में सज्जित वीर की भांति वे आकाश की शोभा बढ़ा देती हैं. (३) अबोध्यग्निर्ज्म उदेति सूर्यो व्यु ३ षाश्चन्द्रा मह्यावो अर्चिषा. आयुक्षातामश्विना यातवे रथं प्रासावीद्देवः सविता जगत्पृथक्.. (४) अग्नि वेदी में प्रज्वलित हो गए हैं. सूर्य आकाश में उदित हो गए हैं. उषा महान हैं. वे अपनी तेजस्विता से सब को प्रसन्न कर देती हैं. हे अश्विनीकुमारो! आप अपने घोड़े रथ में जोतिए, यहां प्रस्थान करिए. सूर्य सभी को अलगअलग कार्य करने की प्रेरणा दे रहे हैं. (४) युङ्गुञ्जाथे वृषणमश्विना रथं घृतेन नो मधुना क्षत्रमुक्षतम्. अस्माकं ब्रह्म पृतनासु जिन्वतं वयं धना शूरसाता भजेमहि.. (५) हे अश्विनीकुमारो! आप अपने रथ में घोड़े जोत कर हमारे यज्ञ में पहुंचिए. हमें घृत से पुष्ट करिए, हमें आत्मज्ञान दीजिए, हमें शत्रुओं को जीतने की क्षमता दीजिए. हम धन पा सकें. हम आप को भजते हैं. (५) अर्वाङ् त्रिचक्रो मधुवाहनो रथो जीराश्वो अश्विनोर्यातु सुष्टुतः. त्रिबन्धुरो मघवा विश्वसौभगः शं न आ वक्षद्द्विपदे चतुष्पदे.. (६) हे अश्विनीकुमारो! आप रथ पर विराज कर यज्ञ में पधारिए. आप का रथ तीन पहियों वाला, मधुर अमृतधारी, द्रुतगामी, अश्वजुत, सराहनीय व तीन लोगों के बैठने की जगह वाला है. वह प्रचुर ऐश्वर्यवान और सौभाग्यवान है. आप सब के प्रति कल्याणकारी भावना रख कर हमारे यज्ञ स्थान में पधारने की कृपा कीजिए. (६) प्र ते धारा असश्चतो दिवो न यन्ति वृष्टयः. अच्छा वाज ᳵ सहस्रिणम्.. (७) हे सोम! आप की झरने वाली धाराएं वैसे ही बरसती हैं, जैसे स्वर्गलोक से बरसात होती है. आप की धाराएं अन्न बरसाती हैं. (७) अभि प्रियाणि काव्या विश्वा चक्षाणो अर्षति. हरिस्तुञ्जान आयुधा.. (८) हे सोम! आप सर्वप्रिय, सर्वद्रष्टा व हरिताभ हैं. आप शत्रुओं पर आयुधों से प्रहार करते हैं. (८) स मर्मृजान आयुभिर्विभो राजेव सुव्रतः. श्येनो न व ᳵ सु षीदति.. (९) हे सोम! आप श्रेष्ठकर्मा (अच्छे कार्य करने वाले) हैं. यजमान आप को परिष्कृत करते ebook converter DEMO Watermarks*

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