भारतकोश
सम्पूर्ण चिकित्सा

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Sampoorna Chikitsa

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा

स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ

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जाता है। वह मुख से पेट में धड़ाम से नहीं गिरता। लेकिन पानी जब मुख से पेट की ओर जाता है तो उसे रोकने वाला कोई नहीं, वह तो पहाड़ पर से जमीन पर गिरने वालों झरने की तरह गिरता है। उसी प्रकार यदि हम खड़े होकर पानी पीयें तो उसके धक्के को झेलने के लिए पेट डायफ्राम को कड़ा कर देता है। यदि हम बार-बार ऐसे ही पानी पीते रहें तो हमें हानिया, पार्प्लस, प्रोस्टेट, अर्थरायटिस जैसी बीमारियाँ अवश्य होंगी।

  • ➤ हमारे शरीर में, नींद आना, भूख, प्यास, छींक, मल निष्कासन, मूत्र निष्कासन, पादना, खाँसी, हँसना, रोना, हिचकी आना, डकार आना, जम्हाई लेना इत्यादि चौदह प्रकार के वेग हैं। यदि इन वेगों को रोका गया तो अनेक प्रकार की बीमारियाँ पैदा हो जाती हैं। हमारी समझ में यह डाल दिया गया है (पाश्चात्य संस्कृति के द्वारा) कि जोर से इन वेगों का निकालना जंगलीपन या असभ्यता की निशानी हैं। इसीलिए आज कल खास करके लड़कियाँ/स्त्री वर्ग व कुछ आधुनिक कहलाने वाले युवक, कर्मचारी वर्ग छींकते, खाँसते इत्यादि समय कम से कम आवाज में व मुख पर रूमाल रखकर ही छींकते, खाँसते हैं, इस प्रकार के वेग शरीर की किसी नाड़ी तंत्र को दुरुस्त करने के लिए हैं और ये लोग उसके लाभ को 75% नष्ट कर देते हैं।
  • ➤ यह समस्या मल्टीनेशनल की देन हैं आज से कुछ दशकों पूर्व, जब यह मल्टीनेशनल का कल्चर भारत तक नहीं पहुँचा था, लोग सबेरे 10 बजे भरपेट खाना खाकर ऑफिस, स्कूल, कॉलेज आदि जाते थे व शाम को 6 बजे तक घर लौट कर भोजन कर लेते थे। उनका कार्यकाल अधिक से अधिक 8 घंटे हुआ करता था अतः वे निरोगी व दीर्घायु थे। आजकल मल्टीनेशनल ने अपने कार्यकाल को 8 घंटों से बढ़ाकर तेरह-चौदह घंटों तक कर दिया है और उनकी देखा-देखी भारत के सभी छोटे-बड़े उद्योग करने

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