सम्पूर्ण चिकित्सा
Sampoorna Chikitsa
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा
स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंआज आप व हम जिस काल में जी रहे हैं शायद इतिहास का वह सबसे बुरा समय है। जो कुछ भी हम अनाज, दालें, सब्जी, फल आदि का सेवन कर रहे हैं वे सब विषयुक्त हैं। दूध, घी, तेल, मसाले आदि मिलावटी हैं, कुछ दवाईयाँ नकली हैं व जिस हवा से हम साँस लेते हैं वह दूषित है, जीवन तनाव व चिंता से भरा है। दूसरी ओर महंगाई इतनी बढ़तीजा रही है कि जहाँ पेट भरना कठिन होता जा रहा है वहाँ बीमार पड़ने पर मरते दम तक डॉक्टर की फीस, रोगों का परीक्षण व दवाई खरीदने में लगने वाले पैसे जुटा पाना असंभव सा
होता जा रहा है। ऐसे वातावरण में भी क्या हम निरोगी रह सकते हैं? इसका उत्तर है हाँ, और यदि हमें कोई दीर्घकालीन असाध्य बीमारी हो गई है तो क्या वह भी ठीक की जा सकती है? इसका भी उत्तर है हाँ। यह बहुत आवश्यक हो गया था कि रोग से मुक्त होने के लिए कोई सस्ता, प्रभावकारी व बिना किसी दुष्प्रभाव वाला विकल्प निकाला जाये व असाध्य और दीर्घकालीन रोगों से स्थायी रूप से मुक्ति पाई जाये।
बीमारियाँ दो प्रकार की होती हैं -
- 1. वे जिनकी उत्पत्ति किसी जीवाणु बैक्टीरिया, पैथोजन, वायरस, फंगस आदि से होती हैं, उदाहरणार्थ- क्षय रोग(टी.बी), टायफाईड, टिटनेस, मलेरिया, न्यूमोनिया आदि। इन बीमारियों के कारणों का पता परीक्षणों से आसानी से लग जाता है।
- 2. वे जिनकी उत्पत्ति किसी भी जीवाणु, बैक्टीरिया, पैथोजन, वायरस, फंगस आदि से कभी भी नहीं होती। उदाहरणार्थ - अम्लपित्त, दमा, गठिया, जोड़ों का दर्द, कर्क रोग, कब्ज, बवासीर, मधुमेह, हृदय रोग, बवासीर, भगंदर, रक्तार्श, आधीसीसी, सिर दर्द, प्रोस्टेट आदि। इन बीमारियों के कारणों का पता नहीं लग पाता।
जब तक हमारे शरीर में वात, पित्त व कफ का एक प्राकृतिक विशिष्ट संतुलन रहता है, तब तक हम बीमार नहीं पड़ते, यह संतुलन बिगड़ने पर ही हम बीमार पड़ते है व यदि संतुलन कहीं ज्यादा
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