सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sankhya Darshana with Hindi Commentary
by महर्षि कपिल
Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)
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Read in contextश्रीः हिन्दी-सांख्य दर्शन विद्याप्रदं गुरुं नत्वा तथा रुद्रं कृपाकरम् । ईश्वरकृष्णसांख्यस्य हिन्दीभाषां करोम्यहम् ॥ सांख्यशास्त्र में प्रवृत्ति का कारण दुःखत्रयाभिघाताज्जिज्ञासा तदपघातकेहेतौ । दृष्टे साऽपार्था चे न्नैकान्तात्यन्ततोऽभावात् ॥१॥ ( क ) क्योंकि — सांख्यशास्त्रीयतत्वों के ज्ञान से तीनों दुःखों की निवृत्ति होती है, अतः उसमें पुरुष की प्रवृत्ति होती है। अथवा तीनों दुःख विनाशी हैं, या उनका विनाश देखा जाता है, अतः उनके नाश के हेतु (सांख्य शास्त्र के तत्वों के ज्ञान) में इच्छा होती है। ( ख ) यदि कहा जावे कि-लौकिक उपाय से तीनों दुःखों का नाश होता है, अतः सांख्य शास्त्र में इच्छा व्यर्थ है? ठीक नहीं, क्योंकि-उस दृष्ट उपाय से ऐकान्तिक तथा आत्यन्तिक दुःख निवृत्ति नहीं होती। अवश्य ही होने वाली दुःखनिवृत्ति एकान्तिक दुःखनिवृत्ति, और जो दुःखनिवृत्ति होकर फिर निवृ- त्त नहीं होती वह आत्यन्तिक दुःखनिवृत्ति कहलाती है। १॥ वैदिक उपाय की अनुपायता । दृष्टवदानुश्रविकः सह्यविशुद्धिक्षयातिशययुक्तः । तद्विपरीतः श्रेयान्व्यक्ताव्यक्तज्ञविज्ञानात् ॥२॥ ( क ) आनुश्रविक या वैदिक उपाय भी दृष्ट उपायके स-