सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sankhya Darshana with Hindi Commentary
by महर्षि कपिल
Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)
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Read in contextहिन्दी सांख्य दर्शन ( ३ ) (क) प्रत्यक्ष, अनुमान और शब्द ये तीन प्रमाणं होते हैं सांख्य लोगों का अभिमान है, कि-और सब उपमान आदि प्रमाणों का इन तीन ही प्रमाणों में अन्तर्भाव हो जाता है। यहां प्रत्यक्षका नाम ‘दृष्ट’, और शब्द प्रमाण का ‘आप्तश्रुति’ नाम लिया गया है । (ख) प्रमाण का निरूपण इस लिये किया गया है कि प्रमेय वस्तु का यथार्थ ज्ञान प्रमाण से होता है यहां ‘प्रमेय’ नाम प्रकृति आदि २५ तत्वों का है । प्रत्यक्ष आदि प्रमाणों के लक्षण प्रतिविषयाध्यवसायो दृष्टं, त्रिविधमनुमानमाख्यातम्। तल्लिङ्गलिङ्गिपूर्वकमाप्तश्रुतिराप्तवचनन्तु ॥५॥ (क) प्रतिविषय नाम अपनें विषय के साथ मिला हुआ इन्द्रिय, उससे उत्पन्न होने वाला (अध्यवसाय) ज्ञान प्रत्य- क्ष ज्ञान होता है। इस ज्ञान का उत्पन्न करने वाला साधन इन्द्रियरूप प्रत्यक्ष प्रमाण कहलाता है । (ख) लिङ्ग (व्याप्य या अल्प देश में रहने वाली वस्तु) और लिङ्गी (व्यापक या अधिक देश में रहने वाली वस्तु) के ज्ञानको अवलम्बन करके अनुमान प्रमाण होता है, अथवा व्याप्ति का ज्ञान अनुमान प्रमाण है। अर्थात्-दो सम्बन्धियों में से एक सम्बन्धी का ज्ञान होना अनुमान प्रमाण है, और उससे दूसरे सम्बन्धी का ज्ञान होना उसका प्रयोजन है । जैसे पीलवान के ज्ञान से हाथी का ज्ञान । यहां पीलवान का ज्ञान अनुमान प्रमाण है, और हाथीका ज्ञान (अनुमिति) उस का प्रयोजन है । ऐसे ही धूम के ज्ञानसे अग्नि के ज्ञान को भी समझना । यह अनुमान प्रमाण तीन प्रकार का है ।