संतति शास्त्र
Santati Shastra
by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव
Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)
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Read in contextगर्भवतीके कर्तव्य ।
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यही बुद्धिका स्थान है। यही स्मरण-शक्तिका निवास है। यही प्रेमका गहवर और यही ज्ञानका भण्डार है। उन वच्चोंका दिमाग सुस्त और निकम्मा होता है कि जिनकी माताएँ गर्भावस्थामें अपने दिमागकी परवाह नहीं रखतीं। वैद्यकका मत है कि गर्भवतीके जिस अंगको दुःख पहुँचना है गर्भके बच्चेका वही अंग विगड़ जाता है। ( श०क० )
गर्भवती स्त्रियाँ बालोंकी रस्सिया बनाकर सरको शत्रुकी तरह बांधती हैं जिससे बालोंकी जड़े खिंच जाती हैं। इतना ही नहीं, सर साफ़ करने तककी परवाह भी नहीं करतीं। मैल जम कर बालोंके छिद्रोंको रोक लेता है जिससे वायुका आना जाना रुक जाता है। खासकर गर्भके समयमें चौथे दिन सर साफ़ करना चाहिये।
वैद्यकका मत है कि गर्भवतीको अतुस्तानके दिनसे अति प्रराज-चित्त रहना, शृंगार करना और सफेद वस्त्र पहनना चाहिये। शान्तिपाठ तथा देवता, ब्राह्मणऔर गुरुओंकी सेवा-में तत्पर रहना, मैले, विकारवाले, हीनांग का दर्शन और स्पर्श न करना, वदनुदार पदार्थोंसे बचना तथा चित्तको विगाड़नेवाली कथाओंपर ध्यान न देना, सूखा, चासी, बुसा और सड़ा हुआ पदार्थ न खाना, बाहर न फिरना, सूते घरों और स्मशानोंमें न जाना, वृक्षके नीचे न रहना क्रोध और भय से बचना, क्रिया संकर न करना, बोक न उठाना, चिह्नाकर न बोलना, गर्भको हानि पहुँचानेवाले आहार-विहारोंसे बचने रहना, अधिक तेल और उचटन न लगाना, परिश्रम न करना, अधिक न सोना, बैठे रहना, बिना विछौनेके, पृथ्वीपर बैठना या सोना न चाहिये।
मीठा पतला हृदयको आनन्द देनेवाला चिकना और