संतति शास्त्र
Santati Shastra
by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव
Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)
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Read in contextजन्म लेनेपर वच्चको दूध कव पिलाना चाहिये ? २४६
मातापैँ हो चुकी हैं, उनके प्रायः उसी दिनसे उत्तर आता है। जब दूध न उत्तरे तो गाय या बकरीका दूध पिलाना चाहिये। परन्तु दूध न उत्तरनेपर भी वच्चको चार बार स्तनोंमें लगाना जरूरी है। इसलिये कि बच्चा अपने दूधका स्थान न भूले और दूधके प्रवाहकी उत्तेजना होती रहे। प्रायः देखा गया है कि स्तनोंमें भरपूर दूध भरा रहनेपर भी बच्चा दूध नहीं पिता। धरके लोग माताकी असावधानी और भूत प्रेतका अनुमान करते हैं, परन्तु कारण कुछ और ही होता है। प्रायः मुँहके अंदर भाग इत्यादिकी सफाई न होनेसे बच्चा छाती नहीं दवा सकता। किसी किसीके जीभके नीचे एक प्रकारकी भिल्ली लगी होती है, उससे बच्चा दूध नहीं खाँच सकता। ऐसी दशामें इन बातों को देख लेना जरूरी है। ऐसी भिल्ली काट देनेसे बच्चा दूध पीने लगता है। जिन स्त्रियोंमें छोटी भिटनी होती है उनसे बच्चे ठीक तौरसे दूध नहीं खाँच सकते। भिटनी छोटी पड़ जानेका कारण यह है कि जो स्त्रियां स्तनोंको खूब कस कर रखती हैं तो दवाव के कारण भिटनी छोटी पड़ जाती है। ऐसी दशाओंमें बच्चको दूध पीना कठिन पड़ जाता है। बहुत सी मातापैँ बच्चको लगातार देरतक दूध पिलाती हैं। ऐसा न होना चाहिये। इससे बच्चा अधिक दूध पी जाता है। ज्यादासे ज्यादा एक बारमें दस मिनटसे अधिक दूध न पिलाना चाहिये।
प्रायः विलासप्रिय मातापैँ अपना दूध नहीं पिलाती, उनके स्तनोंमें दूध सूख जाता है, नसँ कड़ी पड़ जाती हैं। यदि दूसरा बच्चा होनेपर वे पिलाना चाहें तो दूध उत्तरनेमें बड़ी कठिनाई पड़ती है। जिन माताओंके बच्चे बार बार मर जाते हैं, उनके दूधमें एक प्रकारका विष होता है। ऐसी माताओंके