संतति शास्त्र
Santati Shastra
by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव
Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)
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Read in contextदूध कैसे विगाड़ता है ?
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१. यदि दूधका रंग काला अथवा लाल रंगका कसैला जिसमें कुछ वास आती है, अत्यंत रुखा, तरल, भागदार हलका जिसमें बच्चों को रुस करनेकी शक्ति न हो, दुबला करनेवाला, जिसके पीनेसे वायु उत्पन्न हो इस प्रकारका दूध वात-दोषसे दूषित होता है।
(च० श० अ० ८ श्लो० १०८)
२. यदि दूधका रंग काला, नीला, पीला और तांबेके रंगका कड़ुआ खड़ा या चरपरा हो और गंध मुग्दे या क्षधिर-किसी हो, अत्यन्त गरम पित्त-योग उत्पन्न करनेवाला, ऐसा दूध पित्त-दोषसे दूषित होता है।
(च० श० अ० ८ श्लो० १०९)
३. यदि दूधका रंग अत्यन्त सफेद अत्यन्त मीठा और नमकीन हो जिसमें घी, तेल, वसा और मजाके समान गंध तंतु युक्त अथवा पानीमें डालनेसे झूब जावे जिससे कफ पैदा हो, ऐसा दूध कफसे दूषित होता है।
(च० श० अ० ८ श्लो० ११०)
४. यदि वात, पित्त और कफ तीनों दोषके लक्षण मिले तो सन्निपातसे दूषित और यदि दो प्रकारके दूषित लक्षण मिले तो द्विदोषसे दूषित जानना चाहिये। (भा० वा०)
इस प्रकारके दूषित दूध पीनेसे बच्चोंमें अनेक लक्षण प्रगट होते हैं।
१. शरीरकी तौलका कम होना नींद कम आना, उल्टी होना, शरीरका दुबलापन, बलगम पैदा होना, भागदार हरे दस्त आना, आंतोंमें विगाड़, अतिसार, दस्तमें फटा दूध निकलना, पाचन-शक्तिका विगाड़, बराबर कै दस्त और हिचकीका होना इत्यादि।