संतति शास्त्र
Santati Shastra
by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव
Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)
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सम्बन्धित-शाल ।
पैसे लक्ष्योंसे बच्चोंको उंगी समझना चाहिये। बच्चोंका वजन कम होनेकी जांच नौलसे हो सकती है। जब विगड़े हुए दूधका अस्तर वजन पर पड़ता है तब दूध थोड़ा सा ज्वर जल्द रहता है। मोटी वाजी खियामें प्रायः गाढ़ा दूध होता है। इससे स्पष्ट अचानक बड़े और दूधसे भरे रहते हैं। दूध गाढ़ा क्यों हो जाता है? इसका कारण तमदार चर्बी बढ़ानेवाले पुष्ट पदार्थोंका संचय है। इसी प्रकार कम और पतले दूधका विकार भी होता है। गाढ़े दूध होनेपर मावोंका हलका भोजन करना चाहिये। पौष्टिक पदार्थ बढ़ा देना चाहिये। बहुत दिनो तक पिलानेसे भी पौष्टिक पदार्थ बढ़ा देना चाहिये। ज्यादा दिन दूध पिलानेसे अनेक रोग हो जाते हैं। इन्सानिये ज्यादा दिन दूध पिलानेसे बड़े बंधनेके पिलाता उचम माना है। जितने दिनों दूध पीनेवाले पीनेवा उतनी ही देर रजस्वला होनेमें होगी। इस कारण कि वह अथ रज दनमें सहाय होता है। यही कारण है कि दूध पिलावेवाली मावोंको रज कुछ कम निकलता है। खियोंको हर समय यह विचार रखना चाहिये कि वे ऐसी असावधानियोंसे बचे कि जिनसे दूध दूधित हो जाता है। अपना दूध निकाल कर क्षय परीक्षा कर लेनी चाहिये !
जो दूध पानमें डालनेसे मिल जावे, जिसका रंग कुल्हे पीलापन लिये हो, जो जलमें धारोंको न छोड़े हलका और न जमनेवाला ऐसा दूध शुद्ध होता है।
पैनी दशामें बड़ी कठिनाई पड़ती है, जब कि गोदिका बच्चा दूध पीता हो और गर्म रह जावे, ऐसे समयका दूध हानि पहुँचाता है केवल गोदके ही बच्चोंको नहीं, गर्मके बालक