भारतकोश
सेहत संजीवनी

सेहत संजीवनी

Sehat Sanjivani

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: June 2009 First Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Post-Raya, Distt.-Samba (J & K) · 2009 (उद्गम)

DevanagariHindipublished104 पृष्ठ

पृष्ठ 14, कुल 104 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 14

14

साहिब बन्दगी

आधेसिर में दर्द की दवा

  • □ घी, सुपारी और मिश्री—तीनों समान मात्रा लेकर दूध में घिसें और फिर रोगी को सुँघाएँ।

सिर के रोग की दवा

  • □ पीपल, गुड़, अदरक-रस, संधानमक-सबको पानी में घिसें और रोगी को सुँघाएँ।
  • □ 5 ग्राम मिर्ची, 25 ग्राम चौलाई, 12 ग्राम अदरक लेकर पीस लें। जब लेप तैयार हो जाए तो इसका लेप रोगी के सिर पर करें।
  • □ घी, त्रिफला और मिश्री मिलाकर रोगी को एक तोला यह दवा खिलाएँ।

गठिया की दवा

  • □ हंसराज, सौफ की जड़, सौफ, मकाया, मुलहठी, कासनी की जड़, कासनी के बीज, बबूल के फूल—सबको पानी में डालकर काढ़ा तैयार कर लें।
  • □ यह काढ़ा गठिया को समाप्त करता है।
  • □ 12 ग्राम हरड, 7 ग्राम मेंहदी की पतियाँ, 25 ग्राम सनाय, 12 ग्राम बादाम, 4 ग्राम केसरी, 10 ग्राम सफेद निसोथ लेकर कूटपीस लें। फिर चूर्ण के बराबर मिश्री कूटकर मिला लें। अब किसी साफ कपड़े से छान लें। 25 ग्राम यह चूर्ण सुबह लें।
  • □ 35 ग्राम कुचला, 50 ग्राम लहसुन, 250 ग्राम मीठा तेल, 35 ग्राम दालचीनी, 35 ग्राम खाने की सुरती, 10 ग्राम भिलावां—सबको कूटपीसकर मिला लें और धीमी आँच पर रखें। दवा जल जाए तो तेल छानकर किसी शीशी में रख दें।
सेहत संजीवनी · पृष्ठ 14, कुल 104 में से · BharatKosha