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सेहत संजीवनी

सेहत संजीवनी

Sehat Sanjivani

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: June 2009 First Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Post-Raya, Distt.-Samba (J & K) · 2009 (उद्गम)

DevanagariHindipublished104 पृष्ठ

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दो शब्द

❑ चने का सेवन करना। कहावत है—खाओ चने रहो बने ॥ ओरंगजेब बड़ा ही कट्टर था। उसने अपने बाप को बंदी बना लिया था। भाइयों को तो उसने मार दिया। कहा कि ये इस्लाम को स्थापित नहीं कर सकते थे। बाप को जेल में बंद कर दिया। उनको कहा कि आप अप्पाजान हैं, इसलिए आपको नहीं मार रहा हूँ। शाहजहाँ उसे राज्य नहीं देना चाह रहा था। वो बाप को बंदी बनाकर और भाइयों को मारकर जबरन राजा बना था। तब उसने शर्त रखी कि जेल में एक ही अनाज़ मिलेगा। चावल खाना है तो केवल चावल ही मिलेंगे। शाहजहाँ ने कहा कि यदि एक ही मिलेगा तो चना दे देना। फिर कहा कि एक शौक पूरा करूँगा। उसने कहा कि हकूमत करते-करते आदत बन गयी है। इसलिए जेल में 20-25 लड़कों को भेज दिया करना ताकि हकूमत कर सकूँ। यह आदत बन गयी है। यानी ओरंगजेब ने एक शर्त रखी तो चना माँगा। कभी चने की बर्फी खाता था, कभी चिल्ले खाता था। कभी भी ऊबा नहीं।

❑ आँवले का इस्तेमाल करना। यह बूढ़ा भी नहीं होने देगा। इसे अमरफल कहा गया है। इसकी रानी है गाजर। यह रानी है और वो राजा है। आयुर्वेद में आँवले को राजा माना गया है। यूनान में गाजर को अधिक महत्व दिया गया है। वो पहले खुराक के रूप में गाजर का हलवा बोलते हैं।

❑ आयुर्वेद में लिखा है कि भोजन का भोग दवा के रूप में हो। यह कोई टूँस-टूँस कर नहीं खाना है। कुछ सोचते हैं कि यदि 4 फुलके खाते हैं तो रोज़ खाने-ही-खाने हैं। नहीं। आप भोजन की विशिष्टता पर जाएँ, मात्रा पर नहीं जाएँ।

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