भारतकोश
शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद - प्रथम भाग)

शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद - प्रथम भाग)

Shatapatha Brahmana Part 1 - Shukla Yajurveda

महर्षि याज्ञवल्क्य / सायणभाष्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished699 पृष्ठ

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मे दे॒हीति॒ नात्र॑ तिरो॒हित॑मिवास्ति ॥ ९॥ अथाक्ष्यावानक्ति । अरुर्वै - पु॒रुष॒स्याक्षि॑ प्रशान्त्वे॒वेति॒ ह स्माह॒ याज्ञ॑वल्क्यो॒ऽरन्-इव॒ ह्यास पूयो है॒वास्य॑ - दूषी॑का ते॒ऽन्वै॒तदन॑रुष्करोति॒ यद॒क्ष्यावा॑न॒क्ति ॥ १०॥ यत्र॒ वै दे॒वाः । असुररक्ष- - सानि॑ ज॒घ्नुस्तत्कु॒क्षो दान॑वः प्रत्य॒ङ् पति॑त्वा मनु॒ष्या॑णा॒मक्ष्णोः प्रवि॑वेश॒ स ए॒ष क- - नी॑नकः कुमा॒रक॒-इव॑ परिभास॑ते॒ तस्मा॑ऽए॒वैतच्चक्षु॑ष॒प्रय॒त्त्सर्व॑तो॒ऽश्मपु॑रां परिद- - धात्यश्मा ह्याञ्जनम् ॥ ११॥ त्रैककुदं भवति । यत्र वाऽइन्द्रो वृत्रमहंस्तस्य यद- - क्ष्यासीतं॒ गिरि॑ त्रिककुद॒मकरोत्तद्य॒त्रैक॑कु॒द