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भारतकोश
शिव पुराण

शिव पुराण

Shiva Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished850 पृष्ठ

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पृष्ठ 173

*रुद्रसंहिता * १५९

सुरश्रेष्ठ! ऐसा कहकर अपने पुत्रोंके लिये अपने कमलमय आसनपर चुपचाप मुखकी ओर दृष्टिपात करके मैं क्षणभरके बैठ गया। (अध्याय १-२) $\sim\sim\circ\sim\sim$

कामदेवके नामोंका निर्देश, उसका रतिके साथ विवाह तथा कुमारी संध्याका चरित्र—वसिष्ठ मुनिका चन्द्रभाग पर्वतपर उसको तपस्याकी विधि बताना

ब्रह्माजी कहते हैं—मुने! तदनन्तर मेरे अभिप्रायको जाननेवाले मरीचि आदि मेरे पुत्र सभी मुनियोंने उस पुरुषका उचित नाम रखा। दक्ष आदि प्रजापतियोंने उसका मुँह देखते ही परोक्षके भी सारे वृत्तान्त जानकर उसे रहनेके लिये स्थान और पत्नी प्रदान की। मेरे पुत्र मरीचि आदि द्विजोंने उस पुरुषके नाम निश्चित करके उससे यह युक्तियुक्त बात कही।

ऋषि बोले—तुम जन्म लेते ही हमारे मनको भी मथने लगे हो। इसलिये लोकमें ‘मन्मथ’ नामसे विख्यात होओगे। मनोभव! तीनों लोकोंमें तुम इच्छानुसार रूप धारण करनेवाले हो, तुम्हारे समान सुन्दर दूसरा कोई नहीं है; अतः कामरूप होनेके कारण तुम ‘काम’ नामसे भी विख्यात होओ। लोगोंको मदमत्त बना देनेके कारण तुम्हारा एक नाम ‘मदन’ होगा। तुम बड़े दर्पसे उत्पन्न हुए हो, इसलिये ‘दर्पक’ कहलाओगे और सदर्प होनेके कारण ही जगत्‌में ‘कंदर्प’ नामसे भी तुम्हारी ख्याति होगी। समस्त देवताओंका सम्मिलित बल-पराक्रम भी तुम्हारे समान नहीं होगा। अतः सभी स्थानोंपर तुम्हारा अधिकार होगा और तुम सर्वव्यापी होओगे। जो आदिप्रजापति हैं, वे ही ये पुरुषोंमें श्रेष्ठ दक्ष तुम्हारी इच्छाके अनुरूप पत्नी स्वयं देंगे। वह तुम्हारी कामिनी (तुमसे अनुराग रखनेवाली) होगी।

ब्रह्माजीने कहा—मुने! तदनन्तर मैं वहाँसे अदृश्य हो गया। इसके बाद दक्ष मेरी बातका स्मरण करके कंदर्पसे बोले—‘कामदेव! मेरे शरीरसे उत्पन्न हुई मेरी यह कन्या सुन्दर रूप और उत्तम गुणोंसे सुशोभित है। इसे तुम अपनी पत्नी बनानेके लिये ग्रहण करो। यह गुणोंकी दृष्टिसे सर्वथा तुम्हारे योग्य है। महातेजस्वी मनोभव! यह सदा तुम्हारे साथ रहनेवाली और तुम्हारी