श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
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सुरक्षित थी। उसके यशकी ख्याति सुदूरतक फैली हुई थी। ऐसी लंकापुरीमें हनुमान्जीने प्रवेश किया॥ ५६ ॥
उस समय तारागणोंके साथ उनके बीचमें विराजमान अनेक सहस्र किरणोंवाले चन्द्रदेव भी हनुमान्जीकी सहायता-सी करते हुए समस्त लोकोंपर अपनी चाँदनीका चंदोवा-सा तानकर उदित हो गये॥ ५७ ॥
वानरोंके प्रमुख वीर श्रीहनुमान्जीने शङ्खकी-सी कान्ति तथा दूध और मृणालके-से वर्णवाले चन्द्रमाको आकाशमें इस प्रकार उदित एवं प्रकाशित होते देखा, मानो किसी सरोवरमें कोई हंस तैर रहा हो॥ ५८ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें दूसरा सर्ग पूरा हुआ॥
२ ॥