श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
पृष्ठ 1397, कुल 2621 में से
संदर्भ में पढ़ेंइसी तरह जहाँ-तहाँ महामनस्वी राक्षसोंके घरोंमें सीढ़ियोंपर चढ़ते समय स्त्रियोंकी काञ्ची और मंजीरकी मधुर ध्वनि तथा पुरुषोंके ताल ठोकने और गर्जनेकी भी आवाजें उन्हें सुनायी दीं॥ १२ ॥
राक्षसोंके घरोंमें बहुतोंको तो उन्होंने वहाँ मन्त्र जपते हुए सुना और कितने ही निशाचरोंको स्वाध्यायमें तत्पर देखा॥ १३ ॥
को ऽ इ राक्षसोंको उन्होंने रावणकी स्तुतिके साथ गर्जना करते और निशाचरोंकी एक बड़ी भीड़को राजमार्ग रोककर खड़ी हु ऽ इ देखा॥ १४ ॥
नगरके मध्यभागमें उन्हें रावणके बहुत-से गुप्तचर दिखायी दिये। उनमें को ऽ इ योगकी दीक्षा लिये हुए, को ऽ इ जटा बढ़ाये, को ऽ इ मूड़ मुँड़ाये, को ऽ इ गोचर्म या मृगचर्म धारण किये और को ऽ इ नंग-धड़ंग थे। को ऽ इ मुट्ठीभर कुशोंको ही अस्त्र-रूपसे धारण किये हुए थे। किन्हींका अग्निकुण्ड ही आयुध था। किन्हींके हाथमें कूट या मुद्गर था। को ऽ इ डंडेको ही हथियाररूपमें लिये हुए थे॥
किन्हींके एक ही आँख थी तो किन्हींके रूप बहुरंगे थे। कितनोंके पेट और स्तन बहुत बड़े थे। को ऽ इ बड़े विकराल थे। किन्हींके मुँह टेढ़े-मेढ़े थे। को ऽ इ विकट थे तो को ऽ इ बौने॥ १७ ॥
किन्हींके पास धनुष, खड्ग, शतघ्नी और मूसलरूप आयुध थे। किन्हींके हाथोंमें उत्तम परिघ विद्यमान थे और को ऽ इ विचित्र कवचोंसे प्रकाशित हो रहे थे॥ १८ ॥
कुछ निशाचर न तो अधिक मोटे थे, न अधिक दुर्बल, न बहुत लंबे थे न अधिक छोटे, न बहुत गोरे थे न अधिक काले तथा न अधिक कुबड़े थे न विशेष बौने ही॥ १९ ॥
को ऽ इ बड़े कुरूप थे, को ऽ इ अनेक प्रकारके रूप धारण कर सकते थे, किन्हींका रूप सुन्दर था, को ऽ इ बड़े तेजस्वी थे तथा किन्हींके पास ध्वजा, पताका और अनेक प्रकारके अस्त्र-शस्त्र थे॥ २० ॥
को ऽ इ शक्ति और वृक्षरूप आयुध धारण किये देखे जाते थे तथा किन्हींके पास पट्टिश, वज्र, गुलेल और पाश थे। महाकपि हनुमान्ने उन सबको देखा॥ २१ ॥
किन्हींके गलेमें फूलोंके हार थे और ललाट आदि अंग चन्दनसे चर्चित थे। को ऽ इ श्रेष्ठ आभूषणोंसे सजे हुए थे। कितने ही नाना प्रकारके वेशभूषासे संयुक्त थे और बहुतेरे स्वेच्छानुसार विचरनेवाले जान पड़ते थे॥ २२ ॥