श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
पृष्ठ 1779, कुल 2621 में से
संदर्भ में पढ़ेंइस प्रकार वे गुप्तचर राक्षसशिरोमणि महाकाय रावणकी परिक्रमा करके उस स्थानपर गये, जहाँ लक्ष्मणसहित श्रीराम विराजमान थे॥ २३ ॥
सुवेल पर्वतके निकट जाकर उन गुप्तचरोंने छिपे रहकर श्रीराम, लक्ष्मण, सुग्रीव और विभीषणको देखा॥
वानरोंकी उस सेनाको देखकर वे भयसे व्याकुल हो उठे। इतनेहीमें धर्मात्मा राक्षसराज विभीषणने उन सब राक्षसोंको देख लिया॥ २५ ॥
तब उन्होंने अकस्मात् वहाँ आये हुए राक्षसोंको फटकारा और अकेले शार्दूलको यह सोचकर पकड़वा लिया कि यह राक्षस बड़ा पापी है॥ २६ ॥
फिर तो वानर उसे पीटने लगे। तब भगवान् श्रीरामने दयावश उसे तथा अन्य राक्षसोंको भी छुड़ा दिया॥ २७ ॥
बल-विक्रमसम्पन्न शीघ्र पराक्रमी वानरोंसे पीड़ित हो उन राक्षसोंके होश उड़ गये और वे हाँफते-हाँफते फिर लङ्कामें जा पहुँचे॥ २८ ॥
तदनन्तर रावणकी सेवामें उपस्थित हो चरके वेशमें सदा बाहर विचरनेवाले उन महाबली निशाचरोंने यह सूचना दी कि श्रीरामचन्द्रजीकी सेना सुवेल पर्वतके निकट डेरा डाले पड़ी है॥ २९ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें उनतीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ २९ ॥