श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
पृष्ठ 2123, कुल 2621 में से
संदर्भ में पढ़ेंतत्पश्चात् समरविजयी श्रीरघुवीरने अत्यन्त कुपित हो बहुत-से बाण मारकर रावणके सारे अङ्गोंमें घाव कर दिया॥ १२ ॥
इसी बीचमें शत्रुवीरोंका संहार करनेवाले महाबली रामानुज लक्ष्मणने कुपित हो सात सायक हाथमें लिये॥
उन महान् वेगशाली सायकोंद्वारा उन महातेजस्वी सुमित्राकुमारने रावणकी ध्वजाके, जिसमें मनुष्यकी खोपड़ीका चिह्न था, कई टुकड़े कर डाले॥ १४ ॥
इसके बाद महाबली श्रीमान् लक्ष्मणने एक बाणसे उस राक्षसके सारथिका जगमगाते हुए कुण्डलोंसे मण्डित मस्तक भी काट लिया॥ १५ ॥
इतना ही नहीं, लक्ष्मणने पाँच पैने बाण मारकर उस राक्षसराजके हाथीकी सूँड़के समान मोटे धनुषको भी काट डाला॥ १६ ॥
तदनन्तर विभीषणने उछलकर अपनी गदासे रावणके नील मेघके समान कान्तिवाले सुन्दर पर्वताकार घोड़ोंको भी मार गिराया॥ १७ ॥
घोड़ोंके मारे जानेपर रावण अपने विशाल रथसे वेगपूर्वक कूद पड़ा और अपने भाईपर उसे बड़ा क्रोध आया॥ १८ ॥
तब उस महान् शक्तिशाली प्रतापी राक्षसराजने विभीषणको मारनेके लिये एक वज्रके समान प्रज्वलित शक्ति चलायी॥ १९ ॥
वह शक्ति अभी विभीषणतक पहुँचने भी नहीं पायी थी कि लक्ष्मणने तीन बाण मारकर उसे बीचमें ही काट दिया। यह देख उस महासमरमें वानरोंका महान् हर्षनाद गूँज उठा॥ २० ॥
सोनेकी मालासे अलंकृत वह शक्ति तीन भागोंमें विभक्त होकर पृथ्वीपर गिर पड़ी, मानो आकाशसे चिनगारियोंसहित बड़ी भारी उल्का टूटकर गिरी हो॥
तदनन्तर रावणने विभीषणको मारनेके लिये एक ऐसी विशाल शक्ति हाथमें ली, जो अपनी अमोघताके लिये विशेष विख्यात थी। काल भी उसके वेगको नहीं सह सकता था। वह शक्ति अपने तेजसे उद्दीप्त हो रही थी॥
दुरात्मा बलवान् रावणके द्वारा हाथमें ली हुई वह वेगशालिनी, महातेजस्विनी और वज्रके समान दीप्तिमती शक्ति अपने दिव्य तेजसे प्रज्वलित हो उठी॥ २३ ॥