भारतकोश
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

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पृष्ठ 2124

इसी बीचमें विभीषणको प्राण-संशयकी अवस्थामें पड़ा देख वीर लक्ष्मणने तुरंत उनकी रक्षा की। उन्हें पीछे करके वे स्वयं शक्तिके सामने खड़े हो गये॥ २४ ॥

विभीषणको बचानेके लिये वीर लक्ष्मण अपने धनुषको खींचकर हाथमें शक्ति लिये खड़े हुए रावणपर बाणोंकी वर्षा करने लगे॥ २५ ॥

महात्मा लक्ष्मणके छोड़े हुए बाण-समूहोंका निशाना बनकर रावण अपने भाईको मारनेके पराक्रमसे विमुख हो गया। अब उसके मनमें प्रहार करनेकी इच्छा नहीं रह गयी॥ २६ ॥

लक्ष्मणने मेरे भाईको बचा लिया, यह देख रावण उनकी ओर मुँह करके खड़ा हो गया और इस प्रकार बोला— ॥ २७ ॥

‘अपने बलपर घमंड रखनेवाले लक्ष्मण! तुमने ऐसा प्रयास करके विभीषणको बचा लिया है, इसलिये अब उस राक्षसको छोड़कर मैं तुम्हारे ऊपर ही इस शक्तिका प्रहार करता हूँ॥ २८ ॥

‘यह शक्ति स्वभावसे ही शत्रुओंके खूनसे नहानेवाली है, यह मेरे हाथसे छूटते ही तुम्हारे हृदयको विदीर्ण करके प्राणोंको अपने साथ ले जायगी’॥ २९ ॥

ऐसा कहकर अत्यन्त कुपित हुए रावणने मयासुरकी मायासे निर्मित, आठ घण्टोंसे विभूषित तथा महाभयंकर शब्द करनेवाली, उस अमोघ एवं शत्रुघातिनी शक्तिको, जो अपने तेजसे प्रज्वलित हो रही थी, लक्ष्मणको लक्ष्य करके चला दिया और बड़े जोरसे गर्जना की॥ ३०-३१ ॥

वज्र और अशनिके समान गड़गड़ाहट पैदा करनेवाली वह शक्ति युद्धके मुहानेपर भयानक वेगसे चलायी गयी और लक्ष्मणको वेगपूर्वक लगी॥ ३२ ॥

लक्ष्मणकी ओर आती हुई उस शक्तिको लक्ष्य करके भगवान् श्रीरामने कहा—‘लक्ष्मणका कल्याण हो, तेरा प्राणनाशविषयक उद्योग नष्ट हो; अतएव तू व्यर्थ हो जा’॥ ३३ ॥

वह शक्ति विषधर सर्पके समान भयंकर थी। रणभूमिमें कुपित हुए रावणने जब उसे छोड़ा, तब वह तुरंत ही निर्भय वीर लक्ष्मणकी छातीमें डूब गयी॥ ३४ ॥

नागराज वासुकिकी जिह्वाके समान देदीप्यमान वह महातेजस्विनी और महावेगवती शक्ति जब लक्ष्मणके विशाल वक्षःस्थलपर गिरी, तब रावणके वेगसे बहुत गहराईतक धँस गयी। उस शक्तिसे हृदय विदीर्ण हो जानेके कारण लक्ष्मण पृथ्वीपर गिर पड़े॥ ३५-३६ ॥