श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
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इस प्रकार रावणको कार्तवीर्य अर्जुनके हाथसे पराजित होना पड़ा था और फिर पुलस्त्यजीके कहनेसे उस महाबली राक्षसको छुटकारा मिला था॥ २१ ॥
रघुकुलनन्दन! इस प्रकार संसारमें बलवान्-से-बलवान् वीर पड़े हुए हैं; अतः जो अपना कल्याण चाहे उसे दूसरेकी अवहेलना नहीं करनी चाहिये॥ २२ ॥
सहस्रबाहुकी मैत्री पाकर राक्षसोंका राजा रावण पुनः घमंडसे भरकर सारी पृथ्वीपर विचरने और नरेशोंका संहार करने लगा॥ २३ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें तैंतीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ३३॥