भारतकोश
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

DevanagariHindipublished2,621 पृष्ठ

पृष्ठ 2454, कुल 2621 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 2454

‘सती सीता राजा दशरथकी पुत्रवधू और जनककी पुत्री हैं। निष्पाप होनेपर भी पतिने इनका परित्याग कर दिया है। अतः मुझे ही इनका सदा लालन-पालन करना है॥

‘अतः आप सब लोग इनपर अत्यन्त स्नेह-दृष्टि रखें। मेरे कहनेसे तथा अपने ही गौरवसे भी ये आपकी विशेष आदरणीया हैं’॥ २२ ॥

इस प्रकार बारम्बार सीताजीको मुनिपत्नियोंके हाथमें सौंपकर महायशस्वी एवं महातपस्वी वाल्मीकिजी शिष्योंके साथ फिर अपने आश्रमपर लौट आये॥ २३ ॥

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें उनचासवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ४९॥