श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
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‘कौतूहलवश महामुनि वाल्मीकिसे इन बातोंके विषयमें जानना या पूछना उचित न होगा।’ अपने सैनिकोंसे ऐसा कहकर रघुकुलनन्दन शत्रुघ्न महर्षिको प्रणाम करके अपने खेमेमें चले गये॥ २४ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें इकहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ७१॥