श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
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‘नरश्रेष्ठ! ऐसा करनेसे धर्मकी वृद्धि होगी और मनुष्योंकी आयु बढ़ेगी। साथ ही इस बालकको भी नया जीवन प्राप्त होगा’॥ ३३ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें चौहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ७४॥