श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
पृष्ठ 656, कुल 2621 में से
संदर्भ में पढ़ेंथके हुए घोड़ोंको नहलाकर उनके अङ्गोंको शीतलता प्रदान करके उन्हें छायामें घास आदि देकर आराम करनेका अवसर दे राजकुमार भरत स्वयं भी स्नान और जलपान करके रास्तेके लिये जल साथ ले आगे बढ़े। मङ्गलाचारसे युक्त हो माङ्गलिक रथके द्वारा उन्होंने, जिसमें मनुष्योंका बहुधा आना-जाना या रहना नहीं होता था, उस विशाल वनको उसी प्रकार वेगपूर्वक पार किया, जैसे वायु आकाशको लाँघ जाती है॥ ७-८ ॥
तत्पश्चात् अंशुधान नामक ग्रामके पास महानदी भागीरथी गङ्गाको दुस्तर जानकर रघुनन्दन भरत तुरंत ही प्राग्वट नामसे विख्यात नगरमें आ गये॥ ९ ॥
प्राग्वट नगरमें गङ्गाको पार करके वे कुटिकोष्ठिका नामवाली नदीके तटपर आये और सेनासहित उसको भी पार करके धर्मवर्धन नामक ग्राममें जा पहुँचे॥ १० ॥
वहाँसे तोरण ग्रामके दक्षिणार्ध भागमें होते हुए जम्बूप्रस्थमें गये। तदनन्तर दशरथकुमार भरत एक रमणीय ग्राममें गये, जो वरुथके नामसे विख्यात था॥
वहाँ एक रमणीय वनमें निवास करके वे प्रातःकाल पूर्व दिशाकी ओर गये। जाते-जाते उज्जिहाना नगरीके उद्यानमें पहुँच गये, जहाँ कदम्ब नामवाले वृक्षोंकी बहुतायत थी॥ १२ ॥
उन कदम्बोंके उद्यानमें पहुँचकर अपने रथमें शीघ्रगामी घोड़ोंको जोतकर सेनाको धीरे-धीरे आनेकी आज्ञा दे भरत तीव्रगतिसे चल दिये॥ १३ ॥
तत्पश्चात् सर्वतीर्थ नामक ग्राममें एक रात रहकर उत्तानिका नदी तथा अन्य नदियोंको भी नाना प्रकारके पर्वतीय घोड़ोंद्वारा जुते हुए रथसे पार करके नरश्रेष्ठ भरतजी हस्तिपृष्ठक नामक ग्राममें जा पहुँचे। वहाँसे आगे जानेपर उन्होंने कुटिका नदी पार की। फिर लोहित्य नामक ग्राममें पहुँचकर कपीवती नामक नदीको पार किया॥ १४-१५ ॥
फिर एकसाल नगरके पास स्थाणुमती और विनत-ग्रामके निकट गोमती नदीको पार करके वे तुरंत ही कलिङ्गनगरके पास सालवनमें जा पहुँचे॥ १६ ॥
वहाँ जाते-जाते भरतके घोड़े थक गये। तब उन्हें विश्राम देकर वे रातों-रात शीघ्र ही सालवनको लाँघ गये और अरुणोदयकालमें राजा मनुकी बसायी हुई अयोध्यापुरीका उन्होंने दर्शन किया। पुरुषसिंह भरत मार्गमें सात रातें व्यतीत करके आठवें दिन अयोध्यापुरीका दर्शन कर सके थे॥ १७-१८ ॥
सामने अयोध्यापुरीको देखकर वे अपने सारथिसे इस प्रकार बोले—‘सूत! पवित्र उद्यानोंसे सुशोभित यह यशस्विनी नगरी आज मुझे अधिक प्रसन्न नहीं दिखायी देती है। यह वही नगरी है,