शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंवर्तमान संस्करण पर वक्तव्य ।
मेरे जैसे अल्पक्षेपकका अनुवाद किया हुआ “भृङ्गार-शतक” भी जनताने उसी बाह से खुरीदा, जिस बाहसे कि उसने “नीति-शतक” और “वैराग्य-शतक” खुरीदे थे। पबलिककी क़दरानीसे ही, अभी इसी मासमें, “वैराग्य-शतक”का तीसरा और “भृङ्गार-शतक”का दूसरा संस्करण हुआ है। मेरे लिखे ग्रन्थोंको हिन्दी-भाषाभाषी इतने बावसे खुरीदते और पढ़ते हैं, इसका कारण मेरी विद्वत्ता या मेरी लेखन-शौलीकी उत्तमता नहीं, किन्तु दयामय रुग्णकी रूपा है।
इस आवृत्तिमें, मैंने “भृङ्गार-शतक”में बहुत कुछ फेरफार किया है। अनेकों बातें बढ़ा दी हैं, तभी तो यह ग्रन्थ २६३ सफोंसे ४२१ सफों पर जा पहुँचा है। चित्र भी दूने कर दिये गये हैं। पहले २५ चित्र थे, अब प्रायः २६ हैं। कागज़ भी पहलेसे बहुत बढ़िया लगाया है। इतने पर भी मूल्य नहीं बढ़ाया, वही पहलेका मूल्य रक्खा है। आशा है, जगदीशकी क्यासे, क़दरदाँ पबलिक “भृङ्गार-शतक”के इस संस्करणको पहलेसे बहुत ज़ियादा पसन्द करेगी।
इस संस्करणमें भी, मैंने बाबू रघुराज किशोर बी० ए० के “महा-कवि अकबर” और परिडित ज्वालादत्तजी शर्माके “मौलाना हाली” से जहाँ-तहाँ मदद ली है, अतएव मैं उन दोनों सज्जनोंका आभारी हूँ।
विनीत—
हरिदास ।