शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
पृष्ठ 18, कुल 544 में से
संदर्भ में पढ़ें( ७ )
रमणियोंका दासत्व स्वीकार करते हैं। उनके दासत्वमें सच्चा प्रेम और पवित्रता नहीं, केवल सौन्दर्यका प्रभाव है। सौन्दर्य अपने दर्शकोंको मंदिराकी तरह मतवाला कर देता है और वे उसी नशेके वश हो, अपने होश-हवास खो, अपनी माशूकाओंकी गुलामी करने लगते हैं। कामदेव स्त्रियोंका चाकर है, वह जिसे अपना शिकार चुनती हैं, जिसे अपने अधीन करनेकी आज्ञा देती है, वह उसीको अपने पुष्पागुच्छसे क्राबूमें करके, अपनी स्वामिनियोंके हवाले कर देता है। कामदेव ही नहीं, स्वयं परमात्मा स्त्रियोंकी इच्छानुसार चलता है। अंगरेज़ीमें एक कहावत है :—“What woman wills, God wills.” जो स्त्री चाहती है, वही परमात्मा चाहता है। स्त्री और परमात्मा की एक ही इच्छा है।
दोहा ।
विधि हरि हरहु करत हैं, मृगनेनी की सेव ।
वचन अगोचर चरित गति, नमो कुसुमसर देव ॥१॥
सार—कामदेवने त्रिलोकीको स्त्रियोंका गुलाम बना रक्खा है।
1. I bow to that Lord Kamdeva ( Cupid ) who has flowers for his weapon, whose wonderful actions are beyond the power of speech and by whom Shambhu, the self-born ( Brahma ) and Hari have been rendered constant servants of the deer-eyed women to discharge their house-hold duties.