शृंगार शतक

शृंगार शतक
Shringar Shatak
by भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य
Source: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (origin)
Devanagarihipublished544 pages
Page 4 of 544
Read in contextPage 4
भर्तृहरिकृत
शृंगार-शतक ।
शम्भुस्वयंभुहरयो हरिणैर्ज्ञणानां ।
येनाक्रियन्त सततं गृहकर्मदासाः ॥
वाचामगोचरचरित्रविचित्रिताय ।
तस्यै नमो भगवते कुसुमाशुषाय ॥१॥
जिन्होंने ब्रह्मा, विष्णु और महेशको, मृगनयनी कामिनियोंके शरका काम-धन्वा करनेके लिये, दास बना रक्खा है, जिनके वैचित्र्य-चरित्रोंका वर्णन वाणीसे किया नहीं जा सकता,—उन ण्पाशुष भगवान् कामदेवको हमारा नमस्कार है ॥१॥
भगवान् कामदेवकी विचित्र महिमाका पार नहीं । आपके जीब-अजीब कामोंका बखान ज़बानसे कौन कर सकता है ?